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सुरेन्द्र कुमार वर्मा
प्रयागराज, 26 जून : : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है जिसके तहत कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया जा रहा था। न्यायालय ने इस निर्णय को असंवैधानिक करार दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति की पीठ ने अरविंद राठौर द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिका में कहा गया था कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक बनाना पंचायती राज अधिनियम और संविधान के प्रावधानों के विपरीत है।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक संचालन पर संकट खड़ा हो गया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पंचायतों का दैनिक कामकाज कौन देखेगा।
कोर्ट ने राज्य सरकार से इस संबंध में जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी। तब तक सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था की जानकारी देनी होगी।
गौरतलब है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। चुनाव न होने तक शासन ने मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में काम जारी रखने का आदेश दिया था, जिसे अब अदालत में चुनौती मिली है।
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