जेडी न्यूज विजन….
CCTV पर कपड़ा, टॉयलेट में छिपाया कैश…
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राम मंदिर चढ़ावे से हुई चोरी 200 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का अनुमान
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रामलला की पादुका, सोने की प्रतिमा और हीरों का हार भी गायब
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अब तक तमाम सेवादारों से SIT ने की 20 करोड़ रुपये की रिकवरी
०23 जून को SIT ने यूपी सरकार को सौंपी थी प्राइमरी रिपोर्ट….
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है. गुरुवार (25 जून 2026) को इस मामले में 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज किया गया. रातोंरात सबकी गिरफ्तारी भी हो गई.CJM कोर्ट ने सभी आरोपियों को 14 दिन के लिए जेल भेज दिया है. राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है. इस बीच मामले की जांच कर रही स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) की अंतरिम रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी के कथित तरीके को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं. SIT ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कैसे राम मंदिर के कुछ कर्मचारियों और ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने बेहद सुनियोजित तरीके से चढ़ावे की चोरी की. कैसे नोटों की गड्डी और सोने के जेवरों को ठिकाने लगाया गया.
किन-किनके खिलाफ दर्ज हुई FIR?
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में दर्ज हुई FIR में रमाशंकर यादव (टिन्नू यादव), लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष और करुणेश के नाम हैं. इनके खिलाफ गबन, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की धाराएं लगाई गई हैं.
CCTV को कपड़े से किया कवर
न्यूज एजेंसी PTI ने SIT की शुरुआती जांच रिपोर्ट के हवाले से बताया कि राम मंदिर में आए चढ़ावे में कैश की गिनती के दौरान एक कर्मचारी ने CCTV कैमरे को कपड़े से ढंक दिया था. दूसरा कर्मचारी हुंडी से कैश निकाल रहा था. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई एक बार की घटना नहीं थी, बल्कि इसे लंबे समय तक योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, ये पूरा काम रामशंकर यादव ‘टिन्नू’की देखरेख में होता था. टिन्नू चंपत राय का करीबी है. मंदिर में इसकी जिम्मेदारी दानपेटियों में डाले गए पैसों की गिनती से जुड़ी थी. FIR में आरोप है कि टिन्नू ने डोनेशन काउंटिंग से जुड़े 8 महीने के CCTV फुटेज डिलीट करवाए.
टॉयलेट बना कैश छिपाने का ठिकाना….
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर चोरी की गई रकम को तुरंत मंदिर परिसर से बाहर नहीं ले जाया जाता था. अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा कैश को मंदिर परिसर के टॉयलेट में छिपा देते थे.जब सुरक्षा व्यवस्था सामान्य होती या शक की गुंजाइश कम होती, तब आरोपी उसे बाहर निकालकर ले जाते थे. जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क और उसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं. रिपोर्ट में ये भी है कि आरोपी लवकुश ने रामलला के कई सोने के जेवर अपने गांव में गोबर के ढेर के अंदर छिपाए थे. वह मंदिर के चढ़ावे की रकम चुराकर अयोध्या में एक जमीन खरीद चुका था और घर बनवा रहा था.
CCTV फुटेज भी बनी चुनौती
जांच के दौरान एक बड़ी चुनौती CCTV रिकॉर्डिंग की सीमित अवधि भी रही. मंदिर परिसर में लगे कैमरों का फुटेज लगभग 45 दिनों तक ही सुरक्षित रहता है, जिसके बाद ये ऑटो डिलीट हो जाता है. ऐसे में जांच एजेंसियां उपलब्ध फुटेज के साथ-साथ डिजिटल फॉरेंसिक तकनीक की मदद से पुराने डेटा को भी रिकवर करने की कोशिश कर रही हैं.
200 करोड़ रुपये के गबन का आरोप
जांच एजेंसियों के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इस पूरे मामले में लगभग 200 करोड़ करोड़ रुपये के चढ़ावे में गड़बड़ी की आशंका जताई गई है. हालांकि, यह राशि अभी अंतिम नहीं मानी जा रही है. SIT सभी रिकॉर्ड, बैंक डिपॉजिट, कैश काउंटिंग के आंकड़ों और बरामद रकम का मिलान कर रही है. अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक नुकसान का स्पष्ट आंकड़ा सामने आएगा.
कैसे खुला पूरा मामला?
राम मंदिर में चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप पहले सार्वजनिक रूप से सामने आए थे, जिसके बाद इस पर विवाद बढ़ गया. शुरुआत में मंदिर ट्रस्ट ने किसी भी तरह की अनियमितता से इनकार किया. ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि रेगुलर ऑडिट कराया जाता है.लगातार शिकायतें मिलने के बाद PMO ने ट्रस्ट से रिपोर्ट मांग ली. उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय SIT का भी गठन कर दिया.
अब तक कितनी हुई रिकवरी?
अयोध्या CJM कोर्ट के अभियोजन अधिकारी केसी वर्मा ने बताया कि 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. उन्हें सोमवार तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. सभी आरोपियों से कुल 79 लाख 85 हजार 493 रुपये बरामद किए गए हैं. एक आरोपी सुभाष से कोई बरामदगी नहीं हुई, लेकिन वह साजिश में शामिल था. बाकी आरोपियों से अलग-अलग रकम बरामद की गई है. उन्होंने बताया कि मामले में सरकारी कर्मचारी और वे लोग भी शामिल हैं, जिन्हें सरकार से वेतन मिलता है. इसके अलावा कई SBI कर्मचारी भी आरोपी हैं।
मंदिर पर 2475 करोड़ रुपये खर्च?
राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को हुई थी. 13 दिसंबर 2025 को मंदिर ट्रस्ट की बैठक में जानकारी सामने आई थी कि अब तक ट्रस्ट को कुल 4,575 करोड़ रुपये मिले हैं. पिछले 5 साल 9 महीने में मंदिर निर्माण, श्रीराम जन्मभूमि परिसर के विस्तार, जमीन और भवन की खरीद सहित अन्य कई कामों पर 2,475 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. तब राम मंदिर ट्रस्ट के पर कामों पर 2,475 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. तब राम मंदिर ट्रस्ट लगभग 2100 करोड़ रुपये बचे थे।
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