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इस वक्त पर रावण जैसी बुराइयां बहुत लोगों के अंदर आ गई– बाबा उमाकान्त जी महाराज…

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*”इस वक्त पर रावण जैसी बुराइयां बहुत लोगों के अंदर आ गई; लोग मांस-शराब का सेवन करने लगे और व्यभिचार बहुत बढ़ गया है” – बाबा उमाकान्त जी महाराज*

*इस परिवर्तनशील संसार में जब परिवर्तन होगा तो कहीं आप उस चपेट में ना आ जाओ, इसीलिए आप बुराई को छोड़ो और अच्छाई को अपनाओ*

भातानें, पालघर, महाराष्ट्र परम् पूज्य परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने दशहरा 2026 के अवसर पर दिए सतसंग में कहा कि राम और रावण की कथा आज जगह-जगह सुनाई जा रही है। जगह-जगह पर रावण का दहन किया जा रहा है। आज लोग दुष्टता का अंत करते हैं कि रावण दुष्ट था, उसका पुतला बना कर जलाओ लेकिन अब आप यह देखो कि इस वक्त पर रावण जैसी बुराइयां बहुत लोगों के अंदर में आ आ गईं हैं।

मांस का बड़ा प्रचलन हो गया, जीव हत्या बहुत बढ़ गई। लोग मांस खाने लग गए, शराब पीने लग गए और व्यभिचार भी बहुत बढ़ गया। अब आप यह सोचो कि इस तरह देश और समाज कैसे चलेगा, कैसे बचेगा? आपके बच्चे कैसे बचेंगे? कर्मों की सजा से नहीं बच पाएंगे।

इसीलिए इनको समझाने, बताने की जरूरत है कि तुम बुराई में मत फंसो, बुरे का अंत होता है, बुराई खत्म होती है अच्छाई आती है; यह परिवर्तनशील संसार है, यहां बदलाव होता रहता है और जब बदलाव होगा तो तुम उस चपेट में आ जाओगे। अब तो घर-घर में, जन-जन में रावण हो गए।

 

*वक्त गुरु से नामदान लेकर उनके द्वारा बताई गई साधना करके, सेवा करके अपने कर्मों को जला लो नहीं तो कर्मों की सजा मिल जाएगी*

 

आगे का समय बड़ा खराब है। परिस्थितियां दिन पर दिन खराब होती जा रही हैं। इस वक्त पर तो वह समय दिखाई पड़ रहा है कि आदमी घर से निकले तो कोई गारंटी नहीं है कि दो घंटे के बाद अपने घर में वापस आ जाएगा।

“अकाल मृत्यु जग मांहि व्यापे, प्रजा बहुत मरे”

बहुत मर रहे हैं, अकाल मृत्यु बहुत हो रही है। कुछ खुद आदमी हरकत कर रहा है और कुछ प्रकृति कर रही है। लोग प्रकृति के नियम के खिलाफ काम कर रहे हैं तो प्रकृति सजा दे रही है और सरकार के नियम के खिलाफ काम कर रहे हैं तो सरकारें सजा दे रही हैं, तो सजा का ही अब दौर चल रहा है।

अभी तो थोड़ा समय है कर्मों की माफी कराने का, लेकिन धीरे-धीरे ऐसा समय आ रहा है कि कर्मों की सजा भोगनी ही पड़ेगी। इसीलिए आप वक्त गुरु से नामदान लेकर उनके द्वारा बताई गई साधना करके, सेवा करके अपने कर्मों को जला लो। यह मौका है, नहीं तो यह मौका निकल जाएगा। बगैर साधना किए कर्म नहीं जल सकते हैं।

कर्मों की गठरी बहुत भारी हो रही है और इसी में आपको दब जाना पड़ेगा, इसीलिए आज त्यौहार के दिन आपको यह ध्यान रखने की जरूरत है कि कर्मों के चक्कर में कहीं हमारी अकाल मृत्यु ना हो जाए।

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