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योग बिन काया मैली….

जेडी न्यूज विजन….

योग बिन काया मैली है*
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योग एक जीवन शैली है,
योग बिन काया मैली है।
योग एक जीवन दर्शन है,
योग आत्म आकर्षण है।।

पतंजलि योग जनक महान,
योग ही जीवन की है शान।
योग है जीवन का आधार,
प्रकृति संग रहने का है ठार।।

योग एक ऐसी कला महान,
करे तन मन का सही निदान।
योग से चिंता हो जाती है दूर,
योग से तनाव होता काफूर।।

योग से मानसिक हो आराम,
योग से शांति हो आठों याम।
योग से आत्मा पुलकित आम,
योग से ऊर्जा बढ़ती तमाम।।

योग के आठ अंग हैं वरदान,
सभी में होती अदभुत जान।
यम,नियम,आसन, प्राणायाम,
प्रत्याहार, धारणा और ध्यान।।

समाधि अंतिम अंग परिणाम,
मिले सच्चे सुख का वरदान।
योग ही है जीवन का संयोग,
योग से तन- मन होता निरोग।।

योग से सुखी सकल संसार,
योग ही सच्चा जीवन सार।
योग एक जीवन शैली है,
योग बिन काया मैली है।।

डॉ. विश्वम्भर दयाल अवस्थी
” विद्या – सागर ”
शिक्षक एवं वरिष्ठ कवि
खुर्जा, बुलंदशहर (उ. प्र.)
स्वरचित मौलिक एवं अप्रकाशित रचना

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