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आगरा: : उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण को बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत पूरे प्रदेश में “वृक्षारोपण महायज्ञ-2026” का आयोजन किया गया। इस महाअभियान के तहत विभिन्न शहरों में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया। हालाँकि, जहाँ एक ओर सरकार इस मुहिम को पर्यावरण के लिए बड़ी उपलब्धि बता रही है, वहीं आगरा के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और ‘ट्री मैन’ के नाम से विख्यात त्रिमोहन मिश्रा ने इस पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
विकास के नाम पर विनाश का आरोप है मेट्रो और अन्य विकास कार्य के चलते कई पेड़ पौधों का विनाश हुआ है
त्रिमोहन मिश्रा ने अभियान की कार्यप्रणाली पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल नए पौधे लगाने से पर्यावरण का संतुलन नहीं बनेगा, जब तक कि पहले से मौजूद विशाल और पुराने पेड़ों को बचाने की ठोस नीति न हो। उन्होंने सवाल किया, “बड़े और पुराने पेड़ों का विनाश करके आप आखिर कितने पौधे लगाकर उन्हें पेड़ बना पाएंगे? असल में ऐसे विकास का असली नाम ही विनाश है।”
प्रकृति के साथ समन्वय पर जोर
ट्री मैन ने इस बात पर जोर दिया कि विकास की परिभाषा को बदलने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि असली विकास प्रकृति को नष्ट करके नहीं, बल्कि उससे जुड़कर होता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हम पेड़ों को ‘बेचकर’ या उन्हें काट कर कंक्रीट के जंगल खड़े करते रहे, तो भविष्य में इसके परिणाम विनाशकारी होंगे।
पर्यावरण प्रेमियों में चर्चा का विषय
त्रिमोहन मिश्रा का यह बयान पर्यावरण प्रेमियों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। लोग अब इस बात पर विचार करने को मजबूर हैं कि क्या केवल वृक्षारोपण के आंकड़े बढ़ाना ही पर्याप्त है, या फिर हमें पहले से खड़े पुराने वृक्षों को बचाने के लिए अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है।
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