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सुरेन्द्र कुमार वर्मा…
नई दिल्ली : : केदारनाथ साहनी आडिटोरियम में 28 जुलाई को संयुक्त किसान मोर्चा के अखिल भारतीय सम्मेलन में देशभर से आए किसान संगठनों, कृषि मजदूर संगठनों और मेहनतकश जनता के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में घोषणा की कि किसानों, मजदूरों, छात्रों, युवाओं और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष को और व्यापक, संगठित और निर्णायक बनाया जाएगा।
सम्मेलन ने कहा कि 2020–21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन में 736 किसानों के बलिदान के बावजूद केंद्र सरकार ने 9 दिसंबर 2021 को दिए गए लिखित आश्वासनों को लागू नहीं किया। सभी फसलों पर खरीद की गारंटी सहित C2+50% MSP को कानूनी अधिकारC2+50% MSP को कानूनी अधिकार, व्यापक कर्जमाफी, बिजली के निजीकरण पर रोक तथा किसानों पर दर्ज मुकदमों की वापसी जैसे वादे आज तक अधूरे हैं।
सम्मेलन ने भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और अन्य ऐसे समझौतों का विरोध करते हुए कहा कि ये कृषि, खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश की आत्मनिर्भरता पर गंभीर हमला हैं। किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए इन समझौतों को रद्द किया जाना चाहिए।
संयुक्त किसान मोर्चा ने अपनी प्रमुख मांगों को दोहराते हुए कहा की
सभी फसलों के लिए कानूनी MSP (C2+50%)
किसानों, कृषि मजदूरों और ग्रामीण गरीबों के लिए व्यापक कर्जमाफी
मनरेगा में 200 दिन रोजगार और ₹700 प्रतिदिन मजदूरी
चारों श्रम संहिताओं को वापस लिया जाए और श्रमिकों के लिए सम्मानजनक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाए
बिजली निजीकरण विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025 और NFSA संशोधन विधेयक वापस लिए जाएं
जबरन भूमि अधिग्रहण और कॉरपोरेट भूमि पूलिंग पर रोक लगे
आदिवासी, वनवासी और पारंपरिक समुदायों के भूमि एवं वनाधिकारों की रक्षा की जाए
सम्मेलन ने बढ़ती आर्थिक असमानता, कॉरपोरेट केंद्रीकरण और संघीय ढांचे पर हमलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश की संपत्ति कुछ हाथों में सिमटती जा रही है जबकि किसान, मजदूर और आम जनता लगातार संकट में धकेली जा रही है।

संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान–मजदूर–छात्र एकता को वर्तमान दौर की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति बताते हुए कहा कि जनता के शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार, संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप और देश की सामाजिक एकता की हर कीमत पर रक्षा की जाएगी।
सम्मेलन ने आगामी कार्यक्रमों की घोषणा करते हुए कहा कि:
10 अगस्त 2026 को देशभर में 1000 स्थानों पर रेल रोको आंदोलन आयोजित किया जाएगा।
17 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
नवंबर 2026 से गांव-गांव व्यापक जनसंपर्क और संघर्ष अभियान चलाया जाएगा।
संयुक्त किसान मोर्चा ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल किसानों का नहीं, बल्कि देश की खेती, खाद्य सुरक्षा, रोजगार, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और भारत की आत्मनिर्भरता को बचाने का संघर्ष है।
कृषि संकट समाप्त करो – कृषि बचाओ, भारत बचाओ” “संघर्ष तेज करो, कॉरपोरेट के कब्जे से देश बचाओ
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