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लाखों महिलाओं के दर्द को मिली जुबान! व्यापारी नेता दिलीप गुप्ता के नेतृत्व में DM को सौंपा ज्ञापन!
तुलसीपुर बलरामपुर : :
क्या तुलसीपुर और आसपास के सैकड़ों गांवों की माताओं-बहनों को बेहतर इलाज के लिए यूं ही दर-दर भटकना पड़ेगा? क्या हर इमरजेंसी में जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ेगी? अब तुलसीपुर की जनता का सब्र जवाब दे चुका है! जिला उद्योग व्यापार मंडल (रजि.) ने इस गंभीर मुद्दे पर सीधी हुंकार भर दी है।
जिला महामंत्री दिलीप कुमार गुप्ता के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी बलरामपुर से मुलाकात कर तुलसीपुर में आधुनिक महिला चिकित्सालय (Maternity Hospital) के निर्माण की पुरजोर मांग की है!
क्यों मची है खलबली? क्या हैं मुख्य मांगें?
लाखों की आबादी, पर महिला अस्पताल शून्य! प्रसूति और गंभीर स्त्री रोगों के इलाज के लिए महिलाओं को तुलसीपुर से दूर जिला अस्पताल भागना पड़ता है, जिससे समय, धन और कई बार माताओं-बच्चों की जान पर संकट बन आता है।
24 घंटे इमरजेंसी और आधुनिक सुविधाएं: व्यापार मंडल ने मांग की है कि तुलसीपुर में तत्काल एक आधुनिक महिला अस्पताल बने, जहां 24 घंटे आपातकालीन सेवा, विशेषज्ञ महिला डॉक्टर, आधुनिक उपकरण और दवाओं का पूरा इंतजाम हो।
पुराने अस्पताल परिसर के इस्तेमाल का मास्टरप्लान: ज्ञापन में सुझाव दिया गया है कि स्थानीय स्तर पर मौजूद पुराने अस्पताल परिसर का इस्तेमाल कर इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत शुरू किया जाए!
सैकड़ों गांवों को मिलेगी नई जिंदगी: तुलसीपुर तहसील क्षेत्र के दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से सुगम कनेक्टिविटी होने के कारण यह अस्पताल मातृ एवं शिशु मृत्यु दर पर अंकुश लगाने में संजीवनी साबित होगा।
यह समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी है, अब देरी बर्दाश्त नहीं!
जिला महामंत्री दिलीप कुमार गुप्ता का कड़ा रुख:
“महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा से खिलवाड़ बंद होना चाहिए। तुलसीपुर जैसे विशाल और घनी आबादी वाले क्षेत्र में महिला चिकित्सालय की स्थापना समय की सबसे बड़ी मांग है। जिला प्रशासन को इस पर अविलंब और सकारात्मक निर्णय लेना होगा!”
इस दौरान व्यापारी हितों और जनहित की लड़ाई में युवा नगर अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता एवं मीडिया प्रभारी जय सिंह प्रमुख रूप से साथ रहे और मांग को मजबूती से उठाया।
अब सबसे बड़ा सवाल:
क्या बलरामपुर प्रशासन तुलसीपुर की माताओं-बहनों के इस बड़े दर्द को समझते हुए तुरंत एक्शन लेगा? या फिर इलाज के अभाव में महिलाओं की जान जोखिम में पड़ती रहेगी?
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