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लेख-
80 वां स्वतंत्रता दिवस: अतीत के संघर्षों से ‘नए भारत’ के संकल्प तक
हमारा देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। स्वतंत्रता के बाद से आज तक का सफर तय करने वाली पीढ़ी में अस्सी वर्ष से अधिक आयु के वे वरिष्ठ नागरिक भी शामिल हैं, जिन्होंने अभावों और कठिनाइयों का दौर स्वयं जीया है। साथ ही, अपने बुजुर्गों की जुबानी स्वतंत्रता से पूर्व के दौर के अहसासों को सुना है।
साधनहीनता के दौर से निकलकर आज के सुविधा-संपन्न जीवन तक की इस यात्रा को वर्तमान पीढ़ी ने करीब से देखा है। इस दौरान तीन-चार पीढ़ियों का एक लंबा सफर तय हुआ और देश में अभूतपूर्व बदलाव आए। आजादी के बाद भारत तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा। राजनीतिक परिदृश्य बदले, संस्कृति और आचार-विचार में परिवर्तन आया। विकास की अनगिनत सीढ़ियाँ चढ़ते हुए आज हम ‘नए भारत’ में जी रहे हैं। वैश्विक स्तर पर हो रही तकनीकी और बौद्धिक क्रांति को हमने अपनाया है और देश तेजी से आगे बढ़ रहा है—यह एक अकाट्य सत्य है।
हालाँकि, हमारे विशाल और विविध देश में लोकतंत्र की अच्छाइयों के साथ कुछ विद्रूपताएँ भी उभरकर सामने आ रही हैं। राजनीति में पनपती विषैली बेलें और राजनीतिक विरोधी ध्रुवों का आपस में उलझना लक्ष्यों के विरोधाभास को स्पष्ट दर्शाता है।
नई पीढ़ी को साथ लेकर ही अब देश आगे बढ़ सकता है। यह तभी संभव होगा जब सरकारें युवाओं की समस्याओं का समाधान करके उनका विश्वास हासिल करेंगी। घोषणाओं के दम पर चुनाव जीते जा सकते हैं, लेकिन युवाओं की ऊर्जा ही राष्ट्र का वास्तविक भविष्य है। इनकी शक्ति में कठोर संकल्प और क्रांति होती है, जो देश को सही मार्ग दिखाने का सामर्थ्य रखती है।
हमारा स्पष्ट संदेश है कि जो दल युवाओं की शिक्षा और रोजगार की बाधाएँ दूर करेगा, उसी का भविष्य उज्ज्वल होगा। अपराध, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिक वैमनस्यता को पनाह देने वाले लोग जनविरोधी ही नहीं, देशविरोधी हैं। इसके साथ ही, संवैधानिक सदनों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जाए और बुजुर्गों व निराश्रितों पर विशेष ध्यान दिया जाए।
सच्चा स्वतंत्रता दिवस मनाना है, तो जनता के प्रति ईमानदारी और कर्तव्यबोध का संकल्प लें तथा शहीदों को नमन करें। तभी देश की आजादी अक्षुण्ण रहेगी।
जय हिंद! वंदे मातरम!
— मदन वर्मा “माणिक”
(कवि एवं लेखक)
इंदौर, मध्यप्रदेश
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