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नानी जी को समर्पित रचना : :
*कोई मेरा बचपन लौटा दो मुझे नानी के घर जाना है*
🥹गर्मी की छुट्टी के कुछ दिन इत्मिनान से बिताना हैं।
कोई सुकून भरी दोपहर लौटा दो मुझे नानी के घर जाना है। ⛅
पूरा दिन छुपान छुपाई और बर्फ 🧊 पानी में बिताना है भाई बहनों के साथ मिलकर फिर से पतंग 🪁🪁 उड़ाना है कोई मेरा बचपन लौटा दो मुझे नानी के घर जाना है।
साइकिल वाले अंकल लौटा दो मुझे वो फाल्से और जामुन खाना है और ₹20 वाली कुल्फी 🍦के चार 🫶🏻 हिस्से करवाना है कोई मेरा बचपन लौटा दो मुझे नानी के घर जाना है।
बचपन के साथ नानी भी ला दो 🥺 उनके घर पहुंचते ही उनका वह नजर 🧿 उतारना लौटा दो घर से चलते समय वह छुपा कर पैसे 💵 देना लौटा दो कोई मेरा बचपन लौटा दो मुझे नानी के घर जाना है।
मम्मी मौसी और मामा की हंसी वाली लड़ाइयां करवा दो 🤭 नानी की मुस्कुराहट से भरा वो आंगन लौटा दो 🫠🥹
नानी के मना करने पर भी नाना का वो चॉकलेट 🍫 दिलवाना लौटा दो कोई मेरा बचपन लौटा दो मुझे नानी के घर जाना है।
अलंकृता द्विवेदी…
बी कॉम स्कॉलर…
लखनऊ….
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