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नई दिल्ली: : अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए और अन्य राजनीतिक प्राथमिकताओं को देखते हुए केंद्रीय मंत्रिपरिषद में एक बड़े फेरबदल की संभावना तेज हो गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की है। सूत्रों के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में केंद्रीय राज्य मंत्री (MoS) सहित एक दर्जन से अधिक मंत्रियों को हटाया जा सकता है या फिर उनके विभाग बदले जा सकते हैं। इस कवायद को भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा चुनावी राज्यों में रणनीतिक और सांगठनिक संतुलन बनाने के बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस फेरबदल में कम से कम दो कैबिनेट मंत्रियों और तीन राज्य मंत्रियों (MoS) की सरकार से विदाई हो सकती है। आपको बता दें कि हाल ही में जॉर्ज कुरियन ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया है और उनका इस्तीफा राष्ट्रपति ने मंजूर भी कर लिया है। आने वाले कुछ दिनों में केंद्रीय रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू भी अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। भाजा नेतृत्व ने उन्हें विधानसभा चुनाव के लिए वापस पंजाब जाने के लिए कहा है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री को दक्षिण भारत के एक राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण राज्य में भाजपा की कमान सौंपी जा सकती है। इसके अलावा करीब 10 से 12 मंत्रालयों के नेतृत्व में बदलाव और कई मंत्रियों के पोर्टफोलियो बदले जाने की चर्चा है।
NDA सहयोगियों की बढ़ सकती है हिस्सेदारी
इस कैबिनेट विस्तार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के प्रमुख घटक दलों JDP(U), TDP, NCP और RLM को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलने की प्रबल संभावना है। इसमें से जदयू और टीडीपी को अधिक हिस्सेदारी दी जा सकती है। अधिकांश सहयोगी दलों के नेताओं को राज्य मंत्री (MoS) स्तर पर समायोजित किया जाएगा, जबकि एक या दो वरिष्ठ नेताओं को सीधे कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जा सकता है।
भाजपा ने हाल ही में संगठन के भीतर कुछ बड़े बदलाव किए हैं। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। कॉरपोरेट मामलों और सड़क परिवहन राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा का नया अध्यक्ष बनाया गया है।
संगठन में इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद उम्मीद की जा रही है कि संसद के किसी भी सदन लोकसभा या राज्यसभा से नए चेहरों को लाकर इन दोनों नेताओं की मंत्री पद की खाली जगहों को भरा जाएगा। इसके अलावा, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को कर्नाटक भाजपा का अध्यक्ष और एक अन्य नेता को मणिपुर भाजपा का नया अध्यक्ष नियुक्त करने की तैयारी है। मणिपुर को राज्यसभा के रास्ते केंद्रीय कैबिनेट में प्रतिनिधित्व दिए जाने के भी संकेत मिले हैं।
उम्रदराज और राज्यसभा मंत्रियों पर कैंची
पार्टी इस बार युवाओं को आगे बढ़ाने की नीति पर काम कर रही है। जिन मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल इस साल के अंत में या 2027 की शुरुआत में समाप्त हो रहा है उन्हें वापस संगठन के काम में लगाया जा सकता है। साथ ही 70 वर्ष से अधिक आयु के मंत्रियों और कुछ अन्य राज्यसभा सदस्यों की जगह युवा चेहरों को कैबिनेट में शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
पार्टी के विभिन्न मोर्चों के कुछ वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में एंट्री मिल सकती है। बिहार से आने वाले एक कैबिनेट मंत्री को उन्हीं के जाति समूह के किसी अन्य सांसद से रिप्लेस किए जाने की भी चर्चा है।
केंद्रीय नेतृत्व के राडार पर इस समय दक्षिण भारत, उत्तर पूर्व और उत्तर प्रदेश से आने वाले एक-एक राज्य मंत्री हैं, जिनके काम की समीक्षा की जा रही है। रेल, वित्त, कॉरपोरेट, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, कृषि एवं किसान कल्याण, कपड़ा, सहकारिता और जल शक्ति और पर्यावरण मंत्रालय में एमओएस स्तर पर बदलाव की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार वर्तमान में जिन मंत्रियों के पास अतिरिक्त प्रभार हैं उनसे वे विभाग लेकर नए फुल-टाइम कैबिनेट मंत्री नियुक्त किए जा सकते हैं। इसके साथ ही बिहार के सहयोगी दलों के लिए राज्य मंत्री स्तर पर मानव संसाधन विकास और नागरिक उड्डयन जैसे मंत्रालयों में जगह देने पर पार्टी के भीतर अंतिम दौर की बातचीत चल रही है।
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