Jdnews Vision…..
तुलसीपुर (बलरामपुर): : यह जो तस्वीर आप देख रहे हैं, यह किसी सुदूर पिछड़े गांव के नाले की नहीं है। यह दुर्दशा है उत्तर प्रदेश के सुप्रसिद्ध और पवित्र 51 शक्तिपीठों में से एक आदिशक्ति मां पाटेश्वरी देवीपाटन मंदिर के मार्ग की हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरा इलाका सूबे के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का दूसरा गृह जनपद माना जाता है, जहां उनका लगातार आना-जाना लगा रहता है। लेकिन चंद पलों की बरसात ने यहां के विकास दावों की जो पोल खोली है, ।
वीआईपी के आते ही सजता है मंच, जाते ही जनता गड्ढों में!
जब भी माननीय मुख्यमंत्री जी का इस पावन धरती पर आगमन होता है, तो जिले से लेकर मंडल तक के तमाम आला अधिकारी (डीएम, कमिश्नर, कप्तान और पूरी फौज) यहां दिन-रात एक करके मुस्तैद दिखाई देते हैं। बड़ी-बड़ी बैठकें होती हैं, कागजों पर चमचमाती सड़कों के खाके खींचे जाते हैं। लेकिन जैसे ही वीआईपी का काफिला वापस लौटता है, स्थानीय जनता को इसी कीचड़, मलबे और तैरते हुए प्लास्टिक के कचरे वाले ‘सड़क रूपी टापू’ को पार करने के लिए भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है।
श्रद्धालु और स्थानीय जनता बेहाल, जिम्मेदार मौन
तस्वीर साफ बयां कर रही है कि सड़क का नामोनिशान मिट चुका है। घुटनों तक भरे गंदे पानी और गड्ढों के बीच से होकर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय राहगीरों को गुजरना पड़ रहा है। राहगीर आए दिन इन जानलेवा गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
सवाल बड़ा है: जब सूबे के सबसे शक्तिशाली मुख्यमंत्री के सीधे संरक्षण वाले क्षेत्र का यह हाल है, तो बाकी जगहों की क्या स्थिति होगी?
अधिकारियों की लापरवाही आखिर जनता के टैक्स का पैसा और विकास का बजट जाता कहां है? क्या आला अधिकारियों की आंखें इस बदहाली को नहीं देखतीं?
स्थानीय आक्रोशित जनता ने अब सीधे शासन से मांग की है कि इस बदहाली के लिए जिम्मेदार लापरवाह अधिकारियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए और इस मार्ग का स्थाई निर्माण कराया जाए, ताकि मां के दरबार में आने वाले भक्तों को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके।
Jd News Vision