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नागरी प्रचारिणी सभा ने अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कार्यक्रम का किया आयोजन…

जेडी न्यूज विजन….

नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया द्वारा आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस में बतौर मुख्य अतिथि नारी के विषय में अपने विचार वयक्त करते हुए डॉ सत्या पाण्डेय, पूर्व महापौर गोरखपुर ने कहा नारी के अन्दर असीम शक्ति प्रकृति ने दे रखी है। वैसे तो दुनिया के लिए, समाज के स्त्री और पुरुष दोनों समान महत्व रखते हैं, लेकिन महिलाओं में जो त्याग, ममता साहस और शक्ति निहित है वह पुरुषों में नहीं देखने को मिलता। स्त्री अपने अधिकार के लिए अकबर जैसे शक्तिशाली शासक और यहां तक कि यमराज से भी लड़ने की क्षमता रखती है। आगे उन्होंने कहा कि महिलाओं को चाहिए कि मोबाइल की दुनिया से थोड़ा बाहर निकलकर लिखने पढ़ने पर ध्यान दें। वे अपनी क़लम की ताकत से समाज से क्रूरता, हिंसा को मिटाकर दुनिया बदल सकती है। सामाजिक समरसता स्थापित कर सकती हैं।

 


समारोह की विशिष्ट अतिथि श्रीमती अनुभा सिंह, ब्लाक प्रमुख लार ने कहा आज महिलाएं समाज और देश प्रत्येक क्षेत्र में दस्तक दे रहीं हैं वे पंचायत, विधायिका, संसद, सेना साहित्य सभी क्षेत्रों में अपना उत्कृष्ट दे रही है जरुरत है तो सिर्फ इस बात की कि समाज महिलाओं को सम्मान और सहयोग दे।
समारोह में प्रख्यात साहित्यकार डॉ पुष्पा सिंह बिसेन को “महादेवी वर्मा नागरी सम्मान” से सभाध्यक्ष डॉ जयनाथ मणि त्रिपाठी, मंत्री डॉ अनिल कुमार त्रिपाठी, संयोजक डॉ शकुंतला दीक्षित और कार्यसमिति के सदस्य गण द्वारा स्मृति चिन्ह, अंग वस्त्र, प्रशस्ति पत्र और सात हजार एक सौ रु के साथ सम्मानित किया गया। सम्मानोपरानत डॉ विसेन ने अपनी कविता सात फेरे क्या लिए तुम पति का ताज पहन लिए सभा को संबोधित किया और सम्मान के लिए सभा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त किया। इसके पूर्व सभा के अध्यक्ष, मंत्री, संयोजक और समिति के सदस्य गण द्वारा दीप प्रज्जवलन और मां वीणापाणि के चित्र पर माल्यार्पण कर समारोह की औपचारिक शुरुआत हुई। सरस्वती वंदना अंजलि अरोड़ा खुशबू ने की और स्वागत गीत सुनीता सिंह सरोवर ने प्रस्तुत की। तत्पश्चात सौदागर सिंह, दयाशंकर कुशवाहा, गोपाल जी त्रिपाठी, रमेश सिंह दीपक और रामेश्वर तिवारी राजन ने महिला की शक्ति, साहस और धैर्य को लक्षित करते हुए कविता पढ़ी।
आगे सभा के मंत्री डॉ अनिल कुमार त्रिपाठी ने अतिथि गणों के स्वागत के तहत कहा कि आज का दिन सिर्फ एक तारीख नहीं बल्कि उन संघर्षों, जीत और सपनों का है जिसे महिलाओं ने अपने मेहनत से हासिल किया है। मैं अभिनन्दन करता हूं उन माताओं, बहनों और बहुओं का जो ममता के आंगन भरती है।

समारोह की संयोजक डॉ शकुंतला दीक्षित ने महिला कवयित्रियों और श्रोताओं को दुकुल देकर सम्मानित किया और समापन वक्तव्य देते हुए कहा कि एक प्रश्न बार बार दिमाग में उठता है कि आखिर महिला दिवस ही क्यों? निश्चित कहीं न कहीं कोई बात है। यह जो भेद है समाप्त होना चाहिए और स्त्री पुरुष दोनों को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए।

इसके बाद आयोजित द्वितीय रविवारीय कवि गोष्ठी में रीना मिश्रा, आभा मिश्रा, प्रार्थना राय, क्षमा श्रीवास्तव, अर्चना श्रीवास्तव, श्वेता राय, रानी दुर्गावती, पार्वती देवी गौरा, नीरजा सिंह, कौशल किशोर मणि, सरोज कुमार पाण्डेय, इन्द्र कुमार दीक्षित, रविनंदन सैनी, नित्यानंद आनन्द, योगेन्द्र तिवारी योगी आदि कवियों ने कविता पाठ किया। महिला दिवस सम्मान समारोह का संचालन प्रीति पाण्डेय ने और कवि गोष्ठी का संचालन सौदागर सिंह ने किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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