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अमरोहा : : यहां स्थित धनौरा मंडी में विख्यात शिक्षाविद डॉ यतेंद्र कटारिया के पुत्र कुंज के कर्णवेध संस्कार के अवसर पर यजुर्वेद पारायण यज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ के ब्रह्मा सुप्रसिद्ध आर्य विद्वान कुलदीप विद्यार्थी रहे। जिन्होंने भारत की यज्ञ परंपरा पर लोगों का मार्गदर्शन किया और बताया कि सृष्टि में परमपिता परमेश्वर का विशाल यज्ञ चल रहा है। उस यज्ञ की पवित्र भावना मनुष्य के जीवन में जब उतर आती है तो सारा संसार स्वर्ग बन जाता है। इसीलिए प्रतीक रूप में प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन यज्ञ करने की शिक्षा भारतीय वैदिक संस्कृति देती है। इस यज्ञ की पूर्ण आहुति के दिन प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे सुप्रसिद्ध इतिहासकार एवं उत्तर प्रदेश आर्य प्रतिनिधि की सभा की न्याय सभा के प्रधान न्यायाधीश डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि आर्य समाज ने 1857 से लेकर 1947 तक भारत की स्वाधीनता के लिए अथक प्रयास किया। स्वामी दयानंद जी महाराज के इस आंदोलन के प्रेरणा स्रोत बने। उनके राष्ट्रभक्ति से भरे हुए महान व्यक्तित्व से अंग्रेज भी भयभीत रहते थे। एक षड़यंत्र के अंतर्गत महर्षि दयानंद का की हत्या की गई। उनकी बलिदानी परंपरा का निर्वाह भारत की क्रांतिकारी आंदोलन के सभी नेताओं ने किया। यहां तक कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी आजाद हिंद फौज भी महर्षि दयानंद जी के कदमों पर आगे बढ़ी। इसी प्रकार जनसंघ की प्रारंभिक पीढ़ी के नेता भी आर्य समाज की भट्टी से तपकर ही निकले थे। आज इतिहास के गंभीर अध्ययन की प्रवृत्ति छूट जाने के कारण हम अपने ही उन नेताओं को पहचान नहीं पाते जो 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में विभिन्न राजनीतिक सामाजिक मंचों पर जाकर आर्य समाज का डंका बजा रहे थे। इसलिए हम सबको अपने महान पूर्वजों के महान व्यक्तित्व और कृतित्व को समझने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि देश को महर्षि दयानंद जी के चिंतन से अवगत कराने के लिए आज दूसरी वैचारिक क्रांति की आवश्यकता है।
इस अवसर पर आयुर्वेद के मर्मज्ञ डॉ धर्मप्रकाश आर्य ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ यतेंद्र कटारिया जिस प्रकार हिंदी साहित्य की सेवा कर रहे हैं वह अपने आप में अप्रतिम है। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व ऋषि दयानंद जी की विचारधारा को प्रसारित करने में समर्पित हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को भारतीयता के प्रति समर्पित होकर भारत के शत्रुओं को पहचान कर काम करने की आवश्यकता है। इसलिए भारतीय संस्कारों को घर-घर पहुंच कर संस्कृत भारत का निर्माण करने को हम प्राथमिकता दें।

इन 16 संस्कारों के माध्यम से शरीर , मन , बुद्धि और आत्मा के सुसंस्कृत हो जाने से धर्म , अर्थ , काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है और श्रेष्ठ संतान के निर्माण के माध्यम से समाज व राष्ट्र का भी उत्तमता से निर्माण होता है।
डॉ यतेंद्र कटारिया ने इस अवसर पर सभी उपस्थित महानुभावों का हृदय से आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कई जिलों की आर्य प्रतिनिधि सभाओं के जिलाध्यक्ष सहित गौतम बुद्ध नगर वेद प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह आर्य, मंत्री हेम सिंह आर्य सहित महानंद स्वामी जी जैसे अनेक विद्वान उपस्थित रहे।
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