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*सोचा न था*
आप चले जाएंगे छोड़कर सोचा न था,
फिर देखेंगे नहीं मुड़कर सोचा न था।
चलते ढूंढते थक जाऊंगी तब भी मैं,
नहीं ला पाऊंगी ख़ोजकर सोचा न था।
बहुत आवाज़ दी, कहीं होंगे व्यस्त आप,
आवाज़ लौट आएगी थककर सोचा न था।
मुझे कहीं लग न जाए उसकी चिंता से ही,
कभी नहीं आएंगे दौड़कर सोचा न था।
पापा क्यों कहा नहीं आपने की आता हूं मैं!
अब आओगे ही नहीं लौटकर सोचा न था।
✒️ किरण चोनकर “दिवानी”
(धरमपुर- गुजरात)
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