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(सुरेन्द्र कुमार वर्मा)
सुलतानपुर जनपद में झटका मशीनों को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। प्रशासन का कहना है कि खेतों के आसपास लगाई गई अवैध झटका मशीनों से करंट लगने की घटनाएं और मौतें हुई हैं, इसलिए ऐसी मशीनों को हटाना और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई जरूरी है। किसानों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, इसमें कोई दो राय नहीं है।
लेकिन किसानों का सवाल भी गंभीर है-अगर खेतों में आवारा पशु और नीलगाय घुसकर पूरी फसल बर्बाद कर रहे हैं, तो किसान अपनी फसल की सुरक्षा कैसे करे? किसान संगठनों का कहना है कि किसान शौक के लिए खेतों में बाड़ नहीं लगाते। फसल तैयार करने में महीनों की मेहनत, लागत और पूंजी लगती है। रात-दिन खेत की रखवाली करना हर किसान के लिए संभव नहीं है।
किसान संगठनों ने जिलाधिकारी को दिए मांग पत्र में यह भी कहा है कि दुर्घटनाओं के पीड़ितों के प्रति उन्हें पूरी संवेदना है, लेकिन केवल झटका मशीनों को हटाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। प्रशासन को पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आवारा पशुओं और नीलगायों से किसानों की फसल को कैसे बचाया जाएगा।
किसानों ने मांग की है कि उनकी फसल सुरक्षा की गारंटी दी जाए। यदि आवारा पशुओं और नीलगायों से फसल नष्ट होती है तो किसानों को प्रति एकड़ 1.20 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। जब तक इन मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक झटका मशीनों को लेकर किसानों के खिलाफ चल रही कार्रवाई पर रोक लगाई जाए और पहले की गई कार्रवाई पर भी पुनर्विचार किया जाए।
किसान संगठनों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करके कोई सुरक्षित और स्थायी समाधान निकाला जाए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर झटका मशीनें जानलेवा हैं तो उन्हें हटाना जरूरी है, लेकिन क्या उनके हटने के बाद किसानों की फसल की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी प्रशासन लेगा? किसान को एक तरफ मशीन हटाने का आदेश और दूसरी तरफ खेत को आवारा पशुओं से बचाने की मजबूरी के बीच नहीं छोड़ा जा सकता।
किसानों की मांग यह नहीं है कि किसी की जान खतरे में डाली जाए। मांग यह है कि फसल भी बचे और इंसान की जान भी सुरक्षित रहे। इसके लिए प्रशासन को सुरक्षित और मानक आधारित विद्युत फेंसिंग की अनुमति, निगरानी और स्पष्ट नियम बनाने के साथ-साथ आवारा पशुओं एवं नीलगायों से फसल बचाने की स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए।
केवल किसान के खिलाफ कार्रवाई करने से समस्या खत्म नहीं होगी। जब तक खेतों में घुसने वाले आवारा पशुओं और नीलगायों की समस्या का समाधान नहीं होगा, तब तक किसान के सामने वही सवाल खड़ा रहेगा-अपनी महीनों की मेहनत से तैयार फसल को आखिर बचाए कैसे?
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