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(सुरेन्द्र कुमार वर्मा )
..चोरी का जुर्म कबूल कराने के लिए उसे उसके घर से उठाकर थाने ले जाया गया और एक कमरे में बंद कर पट्टे, डंडे और लात-घूंसों से बेरहमी से पीटा गया…
बाराबंकी : : जनपद के बदोसरायं थाने की पुलिस पर एक युवक ने ऐसे गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनसे पुलिसिया कार्रवाई और मानवाधिकारों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता हर्षित मिश्रा उर्फ शानू का आरोप है कि चोरी का जुर्म कबूल कराने के लिए उसे उसके घर से उठाकर थाने ले जाया गया और एक कमरे में बंद कर पट्टे, डंडे और लात-घूंसों से बेरहमी से पीटा गया। आरोप है कि मारपीट के दौरान उसे गालियां दी गईं और चोरी कबूल न करने पर थाने में ही बंद रखने की धमकी दी गई
पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायती पत्र में हल्का दरोगा लक्ष्मीकान्त तिवारी, सिपाही आशीष सिंह और एक अज्ञात पुलिसकर्मी पर मारपीट का आरोप लगाया है। शिकायत के मुताबिक, घटना 11 सितंबर की सुबह करीब 11 बजे की है। आरोप है कि पुलिसकर्मी हर्षित को उसके घर से लेकर बदोसरायं थाने पहुंचे और पीछे के रास्ते से एक कमरे में बंद कर दिया।
पहले दूसरे युवक की पिटाई, फिर हर्षित पर बरसे डंडे!
हर्षित का आरोप है कि कुछ देर बाद कस्बे के ही शिव प्रकाश पुत्र मुनुवा को भी वहां लाया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, पहले शिव प्रकाश के साथ मारपीट की गई और इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसे पीटना शुरू कर दिया। आरोप है कि उससे उसके चाचा मुंजुल मिश्रा के घर हुई चोरी को कबूल करने का दबाव बनाया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने जब मारपीट का कारण पूछा तो कथित तौर पर उससे कहा गया कि चोरी कबूल करने तक उसे थाने में बंद रखा जाएगा
‘बड़े साहब से कहकर फर्जी केस में बंद करा देंगे!’
मामला तब और गंभीर हो गया जब पीड़ित के अनुसार उसे घटना किसी को बताने पर कथित तौर पर धमकाया गया। शिकायत में दावा किया गया है कि पुलिसकर्मियों ने कहा कि यदि उसने शिकायत की तो फर्जी मुकदमे में बंद करा दिया जाएगा या ‘हॉफ एनकाउंटर’ कर दिया जाएगा
पिता ने थाने से ही एसपी कार्यालय को किया फोन
हर्षित के पिता गोपाल मिश्रा को जब बेटे के साथ कथित मारपीट की जानकारी मिली तो वह थाने पहुंचे। शिकायत के अनुसार उन्होंने वहीं से दोपहर 12:39 बजे एसपी के सीयूजी नंबर पर फोन कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पीड़ित का दावा है कि एसपी कार्यालय से थाना प्रभारी को फोन जाने के बाद उसे करीब तीन बजे छोड़ा गया
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि उसके थाने पहुंचने और वहां से वापस जाने का घटनाक्रम थाने के सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड है। उसने यह भी बताया कि 12 सितंबर को जिला अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया है
अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच, थाने की सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच और आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है
अगर आरोप गलत हैं तो सीसीटीवी और जांच से सच सामने आएगा और अगर आरोप सही हैं तो खाकी के नाम पर कानून की ऐसी कथित मनमानी पर कार्रवाई कब होगी
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