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(आर डी बाजपेई )
कभी कालापानी की सजा के लिए ही भेजा जाता था अंडमान निकोबार…
उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता दिनेश शर्मा को अंडमान नीकोबार राज्य का उप राजपाल बना दिया गया है जो वास्तव में बड़े सम्मान और गौरव की बात है
पर यहाँ पर विचारणीय प्रश्न यह है कि क्या यह वास्तव में श्री शर्मा को प्रमोशन दिया गया है.

अगर कुछ अलग से विचार किया जाय तो समझ में आता है यह उनको प्रमोशन नहीं डिमोशन दिया गया है और यह पहली बार नहीं हुआ है खास तौर पर उत्तर प्रदेश में ज़ब भी कोई नेता सीएम पद या शीर्ष पद की दावेदारी के योग्य होता है तो उसको इसी प्रकार का प्रमोशन देकर राजनितिक हथकंडे अपनाये जाते हैँ
श्री शर्मा जो की उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मेयर यूपी के उप मुख्यमंत्री रह चुके हैँ उनको यूपी में 2027में होने वाले आगामी चुनाव से पूर्व ही राज्यपाल का पद देकर अन्य शीर्ष पदों की दौड़ से बाहर कर दिया गया है.
गौरतलब है कि दिनेश शर्मा एक कद्दावर ब्राह्मण चेहरा हैँ.

ऐसा नहीं है कि यह कृत्य पहली बार हुआ है इसके पूर्व भी कलराज मिश्र के साथ भी यही हुआ था ज़ब श्री मिश्रा को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के पद से नवाज़ा गया था
और वो सभी शीर्ष पदों की दौड़ से बाहर हो गए थे
इसके अतिरिक्त पूर्व केंद्रीय मंत्री और भूमिहार नेता मनोज सिन्हा के साथ भी यही हुआ वो उस समय मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे, उनका राजनितिक पद बढ़ता देख कर उनको भी जम्मू कश्मीर का उप राज्यपाल बना दिया गया था.
यह सब ब्राह्मण समाज को सम्मान देने के नाम पर सत्ता का खेल है.
पहले भी इसी प्रकार से नेताओं का सियासी कद को ल कम करने को लेकर कई नेताओं को राज्य पाल या उप राज्य पाल बनाया जा चुका है
जिनमें तमिलिसाई सुंदरराजन,जगदीश मुखी,कविंदर गुप्ता आदि के नाम शामिल हैँ
ये खेल जो इन नेताओं के साथ खेला गया है, और यह सब इसलिए किया गया है की प्रदेश की मुख्यधारा की सियासत पर नियंत्रण बनाये रखा जा सके…
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