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राष्ट्रीय बागवानी मिशन से बदली किसान की तकदीर….

जेडी न्यूज़ विज़न….

*केले की उन्नत खेती से बढ़ी आमदनी और मिली पहचान….
बिलासपुर 11अप्रैल : :  तखतपुर ब्लॉक के ग्राम गोबंद के किसान उस्मान गनी खान की सफलता की कहानी आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए उन्होंने आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल रहे है।
किसान खान पहले सामान्य फसलों की पारम्परिक खेती करते थे, जिससे उन्हें सीमित आय ही प्राप्त होती थी। लेकिन समय के साथ उन्होंने नई तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया। उद्यान विभाग के मार्गदर्शन और सहयोग से उन्होंने वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत उन्नत किस्म जी-9 केले की खेती शुरू की। उन्होंने अपने खेत के लगभग 0.900 हेक्टेयर क्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके से केले का रोपण किया। इसमें उन्नत पौधों का चयन, उचित दूरी पर रोपाई, समय-समय पर सिंचाई, खाद एवं उर्वरक का संतुलित उपयोग और कीट-रोग नियंत्रण जैसे आधुनिक तरीकों को अपनाया गया। इसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि वर्तमान में फसल की स्थिति काफी अच्छी है और पौधे स्वस्थ एवं मजबूत दिखाई दे रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस फसल से लगभग 400 से 600 क्विंटल तक उत्पादन होने की संभावना है, जो पारंपरिक खेती की तुलना में काफी अधिक है। इस पूरी प्रक्रिया में किसान को लगभग 1.50 लाख से 2.00 लाख रुपये तक की लागत आई है। वहीं, बाजार में केले की मांग और उचित मूल्य को देखते हुए उन्हें 4 से 5 लाख रुपये तक की आय होने की उम्मीद है। इस प्रकार किसान को अच्छी खासी शुद्ध आय प्राप्त हो सकती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
किसान उस्मान गनी खान का कहना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाएं और सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाएं, तो कम भूमि में भी अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है। उन्होंने अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी फसलों की ओर रुख करने की सलाह दी है। उद्यान विभाग के अधिकारियों ने भी किसान की इस पहल की सराहना की है और इसे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक आदर्श उदाहरण बताया है। विभाग द्वारा समय-समय पर किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। श्री खान की मेहनत, नई सोच और सरकारी योजनाओं के सही उपयोग ने यह साबित कर दिया है कि अगर किसान जागरूक और प्रयासशील हों, तो खेती को लाभ का सौदा बनाया जा सकता है। उनकी यह सफलता कहानी न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों को नई दिशा भी दे रही है।

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