जेडी न्यूज़ विज़न….
कविता –
अपना क्यों ना सोचें….!
हम इस स्वार्थ की दुनिया में
अपना क्यों न सोचें
जब सब अपना-अपना सोचते हैं,
मगर जेहन में मौजूद भलाई करने
का फितूर ऐसा मुझे करने नहीं देगा,
दूसरे सभी चाहते हैं मुझसे संबल बनूं
मगर वे स्वयं किसी के मददगार नहीं,
स्वार्थ में पड़ी दुनियादारी तमाम किस्से
है इसके मगर ईमान से बेवफ़ाई नहीं आती,
किसी ने चाहा उठ गया फिर साथ उसके गया
इन पड़ी जरूरत तो साथ मेरे कोई न गया।।
– मदन वर्मा “माणिक”
इंदौर, मध्यप्रदेश
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