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. . .तो आखिर कैसे ध्वस्त हो गया राम मंदिर चढ़ावे में गबन का नेट वर्क? …

 जेडी न्यूज विजन…

परिसर में वर्चस्व स्थापित करने की होड़ से जुड़ा है मामला…

पहचान में आया मीडिया तक खबर पहुंचाने वाला ‘भेदिया’ …

घर के भेदी ने हो ढा दिया लंका…

मामला दबता देख मीडिया में किया लीक…

अयोध्या : : राम मंदिर की दानराशि में गबन प्रकरण की जानकारी मीडिया तक पहुंचाने वाले ‘भेदिया’ को खोज लिया गया। अब इस समूह पर कार्रवाई की तैयारी है। हालांकि, अभी संघ के बड़े पदाधिकारियों की सहमति की प्रतीक्षा है।

यह समूह रामजन्मभूमि परिसर के सेवादारों व ट्रस्ट कर्मियों से जुड़ा है। इसने न केवल मंदिर व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव टिन्नू के नेटवर्क को ध्वस्त किया, बल्कि यह बात मीडिया तक भी पहुंचाई।

नागवार गुजरा टिन्नू का दबदबा…

पखवारे भर की उठापटक व एसआईटी जांजांच के बीच ही सूचना लीक करने वाले को खोज कर इसकी जानकारी संघ के बड़े पदाधिकारियों तक पहुंचा दी गई है। उन ट्रस्ट पदाधिकारी को भी जानकारी दे दी गई है, जिनका टिन्नू करीबी है। इस प्रकरण के तार परिसर में वर्चस्व स्थापित करने की होड़ से जुड़े हैं, अन्यथा इसे अंदर ही अंदर दबाने की तैयारी थी।

दानराशि में गबन मामले की अब तक की जांच में स्पष्ट है कि यह खेल वर्षों से चल रहा था। रामजन्मभूमि परिसर से यह बाहर भी नहीं आ पाता, यदि वहीं के लोग इसे मीडिया तक न लाते। सूत्रों का कहना है कि मंदिर व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव टिन्नू का दबदबा परिसर के ही एक समूह को नागवार गुजर रहा था।

टिन्नू ने प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही परिसर की व्यवस्था पर वर्चस्व स्थापित कर लिया था। उसका हर कार्य में प्रभावी दखल रहता था। वह करीबी तो ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी का था, परंतु उसकी अन्य दोनों जिम्मेदारों के समर्थकों से भी पटती थी।

प्रशासन का वाकी-टाकी उसके पास रहने से वह बड़े जनसमूह को विशिष्ट दर्शन भी करा देता था। इन्हीं कारणों से उसके नेटवर्क को ध्वस्त करने का चक्रव्यूह रचा गया। पहले उससे नजदीकियां बढ़ाई गईं और सारे राज इकट्ठा किए गए। फिर उन्हीं पदाधिकारी को सूचना दी गई, जिनका वह विश्वस्त रहा।

बाद में मामला दबते देख मीडिया में जानकारी लीक कर दी गई। इस घटनाक्रम का सूत्रधार कौन बना, इसे कई दिनों से खोजा जा रहा था। अब उन्हें तलाश लिया गया और संघ के पदाधिकारी व मंदिर व्यवस्था के जिम्मेदारों तक यह जानकारी पहुंचा भी दी गयी है।

जल्द ही इस समूह के विरुद्ध कार्रवाई की तैयारी है। अभी इस प्रकरण के पटाक्षेप की प्रतीक्षा है। इस समूह में ट्रस्ट कर्मियों के साथ कुछ स्वयंसेवक भी हैं।

अयोध्या के नहीं हैं ‘भेदिया’

सूत्रों का कहना है कि जिन लोगों ने सूचना फैलाई, वे स्थानीय नहीं हैं। संघ व विहिप से तो जुड़े हैं, परंतु अन्य जिलों से यहां आकर सेवारत हैं। ये भी संघ के बड़े पदाधिकारी के विश्वस्त हैं, इसलिए तुरंत कार्रवाई से बचा जा रहा है।

उधर, एसआईटी जांच के कारण परिसर के कर्मियों में इतना भय व्याप्त हो गया है कि अब वे अपने परिचितों से भी मोबाइल फोन पर बात करने से घबरा रहे हैं। कुछ लोगों के मोबाइल जमा करा लिए जाने की भी सूचना मिली है।

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