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आषाढ़ का बदला”
आषाढ़ का महीना आ गया,
छम छम बूंद की वर्षा,
मन भर गया मांगों के साथ,
भीतर उठ रहा है शोर,
आकाश में काले-काले बादल
, रात में सुहावना जैसा,
बाहर घनघोर का शोर,
पक्षियों की चहक चहक आवाज,
रात घटा घुमड़ी जैसी,
सड़कों पर बह उठा पानी,
रिमझिम बारिश की वह बंदे,
मोर का मनोहर नाच,
आसमान पर छा गई बादल,
अब बारिश का हो रहा इंतजार,
जब जब पानी बरसता,
फूलों की महक मिलती है,
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