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राम कथा का चौथा दिन : : महतारी शब्द में निहित है वात्सल्य का अद्भुत भाव : रामभद्राचार्य….

जेडी न्यूज़ विज़न…..

 (आर डी शुक्ला )

….वरिष्ठ पत्रकार …..

श्रीराम कथा का चतुर्थ दिवस : तजहु तात यह रूपा कहने पर शिशु बने श्रीराम….

लखनऊ: :  पद्मविभूषण तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के चतुर्थ दिवस भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि राम की बाल लीला में उनके स्वभाव और चरित्र दोनों के दर्शन होते हैं। भगवान की प्रत्येक लीला लोकमंगल के लिए होती है तथा बाल्यकाल में भी उनके दिव्य स्वरूप और मर्यादा की झलक स्पष्ट दिखाई देती है।

सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में उत्सव संस्था के तत्वावधान में चल रही श्रीराम कथा में विश्वविख्यात संत रामभद्राचार्य ने कहा कि अवध क्षेत्र में मां को महतारी कहा जाता है। मम्मी अथवा मदर जैसे शब्दों में वह भाव नहीं है जो महतारी शब्द में निहित है। महतारी अपने स्नेह और वात्सल्य को संतान पर उडे़ल देती है। उन्होंने कहा कि अवध की लोकसंस्कृति में मातृत्व की जो गरिमा है उसका अद्भुत प्रतीक महतारी शब्द है।

श्रीराम जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने भये प्रकट कृपाला पद की विस्तृत व्याख्या की। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रचलित पाठ में कई बार निज आयुध भुज चारी बोला जाता है, जबकि सही पाठ निज आयुध भुज धारी है। उन्होंने कहा कि भगवान राम अपने विभिन्न अंशों के साथ अवतरित हुए। क्षीरसागर के विष्णु लक्ष्मण के रूप में, बैकुंठ के विष्णु भरत के रूप में तथा श्वेतद्वीप के विष्णु शत्रुघ्न के रूप में प्रकट हुए। उन्होंने कहा कि भगवान जब प्रकट हुए तब पंद्रह वर्ष के किशोर रूप में थे। बाद में माता कौशल्या के अनुरोध तजहु तात यह रूपा के उपरांत उन्होंने शिशु रूप धारण किया।

कथा के दौरान रामभद्राचार्य ने अपने बाल्यकाल का एक संस्मरण भी सुनाया। उन्होंने बताया कि जब वे लगभग तीन वर्ष के थे, तब उनके गांव में एक मदारी बंदर का खेल दिखाने आया था। खेल देखते समय वे बच्चों के साथ भागते हुए एक सूखे कुएं में गिर पड़े। उसी दिन उन्होंने अपने पितामह से भये प्रकट कृपाला पद कंठस्थ किया था। कुएं में गिरने के बाद वे लगातार यह चरित जे गावहिं, हरि पद पावहिं, ते न परहिं भवकूपा का स्मरण करते रहे। उन्होंने कहा कि प्रभु की कृपा से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि रामकथा केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन ही नहीं देती, जीवन में संकट के समय भी संबल प्रदान करती है।

कथा के दौरान उन्होंने कहा कि भगवान की बाल लीलाओं में भी उनकी ब्रह्मरूपता एक क्षण के लिए भी ओझल नहीं होती। वे पूर्ण रूप से सजग रहते हैं और भक्तों को आनंद तथा वात्सल्य रस का अनुभव कराने के लिए मानवीय लीलाएं करते हैं।

 

इस अवसर पर इंटरनेशनल वैश्य फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष सुरेन्द्र गुप्ता, रविन्द्र गोयल, गोपाल खण्डेलवाल, पीसीयू के उपसभापति ब्रजकिशोर गुप्ता, सुधीर हलवासिया सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा के उपरांत सर्वश्री राकेश पाण्डेय, श्यामजी अग्रवाल, रवि तिवारी, डॉ. अजय गुप्ता तथा अन्य श्रद्धालुओं ने आरती में सहभागिता की। आयोजक संस्था उत्सव, मारवाड़ी युवा मंच, श्याम प्रेमी सेवा संघ ट्रस्ट, बोरा फाउंडेशन, इंटरनेशनल वैश्य फेडरेशन आदि संस्थाओं के स्वयंसेवकों ने व्यवस्था संभाली। मीडिया प्रभारी डा. एस.के.गोपाल ने बताया कि शुक्रवार को श्रीराम कथा के पांचवें दिवस भारत सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित प्रदेश सरकार के मंत्रीगण एवं अन्य जनप्रतिनिधि भी सम्मिलित होंगे।

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