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(संतोष कुमार गुप्ता )
गोरखपुर : : गगहा थाना क्षेत्र के गजपुर बाजार में किसी सभ्य समाज का हिस्सा है या यहाँ पूरी तरह से जंगलराज कायम हो चुका है? यह सवाल आज गजपुर बाजार का हर आम नागरिक प्रशासन से पूछ रहा है। बाजार में आए दिन हो रही मारपीट, गाली-गलौज और खुलेआम गुंडागर्दी ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। भीड़भाड़ और चरमराई यातायात व्यवस्था के कारण यहाँ हर मिनट बवाल खड़ा हो रहा है, लेकिन क्षेत्र की सुरक्षा का दम भरने वाला प्रशासन हाथ पर हाथ धरे तमाशा देख रहा है।

*सड़कें बनी अखाड़ा, खौफ के साए में जीने को मजबूर लोग*
गजपुर बाजार अब खरीद-बख्त का केंद्र कम और ‘खूनी अखाड़ा’ ज्यादा नजर आता है। बेतरतीब अतिक्रमण, आड़े-तिरछे खड़े वाहन और बेकाबू भीड़ के चलते जरा सी मोटरसाइकिल छू जाने या राह चलते कंधा टकरा जाने पर सीधे लाठी-डंडे निकल आते हैं। आए दिन होने वाले इस तांडव के कारण बाजार में आने वाली महिलाएं और बच्चे सहमे हुए हैं। व्यापारियों का धंधा चौपट होने की कगार पर है, क्योंकि लोग अब डर के मारे गजपुर बाजार आने से कतराने लगे हैं।

*लाचार या लापरवाह? मूकदर्शक बने बैठे हैं जिम्मेदार अधिकारी*
सबसे शर्मनाक स्थिति स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक महकमे की है। बाजार में जब सरेआम हंगामा और मारपीट होती है, तब पुलिस प्रशासन चैन की बंसी बजा रहा होता है।
> *स्थानीय आक्रोशित युवाओं का कहना है:*
“बाजार में जब सिर फुटव्वल हो जाता है, तब जाकर पुलिस की गाड़ी रेंगते हुए पहुंचती है। प्रशासन की यह सुस्ती साफ दर्शाती है कि उन्हें जनता की जान-माल की कोई परवाह नहीं है। पुलिस का काम सिर्फ तमाशबीन बने रहना रह गया है।”

*धैर्य का बांध टूटा, तो भुगतना होगा अंजाम*
प्रशासन की इस नपुंसकता और अनदेखी से अब जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही बाजार से अतिक्रमण हटाने, यातायात दुरुस्त करने और उपद्रवियों पर नकेल कसने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए, तो उग्र जन-आंदोलन तय है।
क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या किसी की जान जाने का इंतजार कर रहा है, तभी उसकी नींद टूटेगी?
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