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बिलासपुर : : प्रार्थी रजनीश सेठ, निवासी गणेश चौक, थाना सिविल लाइन, परिवार सहित दिनांक 18.07.2026 से ऋषिकेश घूमने गए हुए थे। उनके घर पर एक सुरक्षा गार्ड प्रतिदिन रात्रि 10:00 बजे से प्रातः 07:00 बजे तक ड्यूटी करता है। दिनांक 23.07.2026 की रात्रि ड्यूटी के दौरान गार्ड ने घर के पीछे लगी विंडो ए.सी. निकली हुई देखकर प्रार्थी को फोन पर सूचना दी। प्रार्थी द्वारा अपने पुत्र एवं एक परिचित को घर भेजकर जांच कराई गई, जिसमें पता चला कि कोई अज्ञात व्यक्ति विंडो ए.सी. हटाकर घर के अंदर प्रवेश कर अलमारी की चाबी से अलमारी खोलकर चोरी कर ले गया। प्रार्थी द्वारा वीडियो कॉल के माध्यम से प्रारंभिक तौर पर लगभग ₹1.85 लाख से ₹2.35 लाख नगद, 15-20 तोला सोने के आभूषण एवं अन्य सामान चोरी होना अनुमानित रूप से बताया गया तथा वापस आने के बाद घर का निरीक्षण कर वास्तविक विवरण देने की बात कही गई।
प्रार्थी थाना उपस्थित होकर लिखित आवेदन प्रस्तुत किया तथा बताया कि प्रारंभिक रूप से जिन वस्तुओं के चोरी होने की आशंका व्यक्त की गई थी, उनमें से कुछ महत्वपूर्ण एवं कीमती सामान घर में ही सुरक्षित मिल गए हैं। शेष चोरी गए सामान के संबंध में प्रार्थी द्वारा लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने पर थाना सिविल लाइन में अज्ञात आरोपी के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई।
उक्त प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए थाना सिविल लाइन पुलिस एवं ACCU टीम की संयुक्त टीम गठित कर आरोपियों की तलाश प्रारंभ की गई। टीम द्वारा घटनास्थल एवं आसपास के सीसीटीवी फुटेज का अवलोकन, तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिर सूचना एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर 10 से 13 वर्ष आयु के तीन विधि से संघर्षरत बालकों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान उनके द्वारा चोरी की घटना कारित करना स्वीकार करने पर उनकी निशानदेही एवं कब्जे से चोरी गया मशरूका बरामद किया गया।
आरोपियों के कब्जे से चोरी गया ₹1,06,635/- नगद, ₹4,500/- के पुराने नोट, सोने-चांदी के विभिन्न आभूषण, बहुमूल्य रत्न, पीतल एवं कांसे के पूजा एवं घरेलू उपयोग के सामान, नल की टोटियां, सिटकनी, कब्जे तथा अन्य धातु के फिटिंग संबंधी सामान बरामद कर विधिवत जप्त किया गया।
प्रकरण में संकलित साक्ष्यों एवं आरोपियों से पूछताछ के आधार पर चोरी की घटना का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। जप्त मशरूका की पहचान प्रार्थी द्वारा की गई है। प्रकरण में आवश्यक वैधानिक कार्यवाही पूर्ण करते हुए तीनों विधि से संघर्षरत बालकों के विरुद्ध किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम एवं अन्य प्रचलित विधिक प्रावधानों के अनुसार अग्रिम कार्यवाही की जा रही है।
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