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*”संस्कृत भाषा घर-घर की भाषा बनाने में गृहे-गृहे संस्कृतम् योजना का विशेष योगदान -योजना समन्वयक”…..
लखनऊ, 13 अगस्त : : उत्तर प्रदेश शासन के स्वायत्तशासी उत्तरप्रदेशसंस्कृतसंस्थानम् द्वारा संचालित “गृहे गृहे संस्कृतम्” योजना के अंतर्गत संस्कृत भाषा शिक्षण कक्षाओं के अगस्त मासीय कक्षाओं का उद्घाटन गुरुवार को सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में प्रदेश के लगभग ४२ जनपदों से जुड़े करीब ५४ शिक्षण केंद्रों की सहभागिता रही।

कार्यक्रम संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष मनीष चौहान एवं निदेशक प्रेमेन्द्र कुमार गुप्त के निर्देशन में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में योजनाप्रभारी भगवान सिंह चौहान ने कहा कि योजना के माध्यम से हम सभी मिलकर के संस्कृत भाषा को घर-घर की भाषा बनाएं। जिसमें प्रशिक्षकों का विशेष योगदान है और प्रशिक्षक बहुत ही परिश्रम से अपने दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं तथा समन्वयक डा.अनिल गौतम ने सभी प्रशिक्षकों का तथा उपस्थित लोगों का धन्यवाद ज्ञापन किया और कहा कि संस्कृत को व्यवहार में लाने की आवश्यकता है। गृहे गृहे संस्कृतम् योजना संस्कृत भाषा के संरक्षक के रूप में अनवरत कार्य कर रही है। इस योजना के अंतर्गत कार्यरत सभी प्रशिक्षक भाषा के संवर्धन व प्रचार प्रसार में महती भूमिका निभा रहे हैं।उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षण को केवल व्याकरण तक सीमित न रखकर संवाद, कहानी, गीत, अभिनय, खेल तथा तकनीकी माध्यमों से जोड़ा जाना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन योजना के प्रशिक्षक श्री गरुड़ मिश्र जी ने किया। अतिथियों का स्वागत योजना की प्रशिक्षिका निलाक्षी श्रीवास्तव ने किया तथा प्रशिक्षक मुकेश पाठक ने शांति मंत्र के द्वारा कार्यक्रम का संपूर्ति किया।
जनपद-लखनऊ के नेता जी सुभाष चन्द्र बोस राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय अलीगंज लखनऊ में प्रधानाध्यापिका ने कहा कि हमारे यहां आयोजित शिविर में संस्थान द्वारा प्रेषित शिक्षिका मुन्नी देबी
इस शिविर के माध्यम से संस्कृत सीखायेंगी।
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