Jdnews Vision….
लेख –
नर्मदा किनारे मंडलेश्वर के पास ग्राम देवगढ़ चोली के प्राचीन पाषाण निर्मित “सिद्धि विनायक जगतप्रसिद्ध गणेश जी”
नर्मदा किनारे स्थित अति प्राचीन, सदियों पुरानी एक ही पाषाण (अखंड शिला) से निर्मित श्री सिद्धि विनायक गणेश जी की यह विशाल प्रतिमा अत्यंत चमत्कारी, अलौकिक तथा अनूठी है। संपूर्ण विश्व में संभवतः यह एकमात्र ऐसी प्रतिमा है, जिसमें भगवान गणेश अष्टभुजा रूप में नृत्य करते हुए विराजित हैं। यह प्रतिमा लगभग 11 फीट से भी ऊंची है। मान्यता है कि मनोकामना पूर्ति हेतु प्राचीन काल से ही राजा-रजवाड़े, मंत्री एवं राजमाताएं यहां दर्शन लाभ हेतु आते रहे हैं।
यह पवित्र स्थल मंडलेश्वर एवं महेश्वर के समीप मात्र 6-7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम देवगढ़ चोली में स्थित है, जहां अनेक प्राचीन मंदिर विद्यमान हैं। शासन, प्रशासन एवं पुरातत्व विभाग की जानकारी में होने के बावजूद दुर्भाग्यवश यह ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक स्थल उपेक्षा का शिकार हो रहा है।
लगभग सौ के करीब प्राचीन स्थलों से सुशोभित देवगढ़ चोली में इस गणेश मंदिर के ठीक सामने मेरे नानाजी का घर था। आज से 67 वर्ष पूर्व मेरा जन्म यहीं गणेश चतुर्थी के दिन प्रात: चार बजे हुआ था। भगवान श्री गणेश जी की असीम कृपा से ही मेरी लेखनी निरंतर चल रही है। आज भी यहां अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक दर्शन हेतु आते हैं।
देवगढ़ चोली में गौरी सोमनाथ का विशाल मंदिर है, जहां का शिवलिंग की ऊंचाई 11 फीट से भी अधिक हैं। मंदिर के ऊपरी भाग में एक विशाल सभामंडप निर्मित है, जिसमें देवी-देवताओं, देवदूतों एवं अनेक सौभाग्य चिह्नों को पत्थरों पर उकेरा गया है।
आगे सामने पाषाण निर्मित विशाल नंदी की मूर्ति भी है। यह स्थापत्य कला की दृष्टि से एक अत्यंत भव्य एवं विशाल मंदिर है।
इसके अतिरिक्त यहां विशाल भैरव जी का चमत्कारी मंदिर, साढ़े ग्यारह हनुमान जी के मंदिर, चौंसठ योगिनी की प्राचीन प्रतिमाएं तथा श्री बांके बिहारी श्रीकृष्ण व ललिता जी का पावन मंदिर स्थित है। ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार वृंदावन-मथुरा से आए श्रद्धालु एवं संत जनों के सानिध्य में यहां रासलीला का आनंद श्रद्धालुजन लिया करते हैं।
इस स्थान को ‘देवगढ़ चोली’ के नाम से जाना जाता है। यहां स्थापित देव मूर्तियां परमार कालीन एवं भोजकालीन बताई जाती हैं, जिन्हें होल्कर शासनकाल में महारानी अहिल्याबाई तथा उनके पश्चात महारानी कृष्णाबाई ने संरक्षण प्रदान किया था।
यह ग्राम प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से भी अद्वितीय है। यहां प्राचीन तालाब एवं सुंदर घाट निर्मित हैं। इंदौर, महू और निमाड़ के प्रवेश मार्ग पर होलकर कालीन शासन में निर्मित ‘जाम गेट’ से मात्र 17 किलोमीटर की दूरी पर चोली गांव स्थित है। यह मंडलेश्वर से 6 किलोमीटर, जहां से माँ नर्मदा प्रवाहित होती हैं, प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मांडव भी लगभग 40 किलोमीटर तथा पवित्र ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर यहां से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
आइए, धर्म, कर्म, आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक धरोहरों से युक्त इस पावन स्थल का दर्शन करें और सिद्धि विनायक श्री गणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त किया..
मदन वर्मा “मणिक ”
Jd News Vision