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*गोरक्षपीठ से पीढ़ियों का आत्मीय लगाव….
गोरखपुर: : गोरखपुर की आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान में गोरक्षपीठ का स्थान सदैव विशिष्ट रहा है। ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ जी महाराज ने इस परंपरा को नई ऊंचाई देते हुए सामाजिक समरसता, हिंदुत्व और समाजसेवा के क्षेत्र में अमिट योगदान दिया। आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन और विनम्र श्रद्धांजलि।
गोरक्षपीठ और गोरक्षपीठाधीश्वर के प्रति हमारे परिवार का लगाव एक पीढ़ी का नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों से चला आ रहा आत्मीय संबंध है। इसमें केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि पारिवारिक अपनत्व, मार्गदर्शन और अटूट विश्वास की गहरी छाप रही है।
*पूर्वजों से शुरू हुई परंपरा*
हमारे परदादा स्व. लाला रावत और स्व. रामजस रावत गोरक्षपीठ से गहरे जुड़े रहे। स्व. लाला रावत दूरदर्शी सोच और व्यापक सामाजिक सरोकार वाले व्यक्तित्व थे। उस दौर में संभ्रांत और प्रतिष्ठित लोगों के बीच उनका उठना-बैठना था। गोरक्षपीठ के तत्कालीन महंत ब्रह्मलीन महंत ब्रह्मानंद जी और योगी गंभीरनाथ जी महाराज से उनकी घनिष्ठ निकटता रही। उन्होंने परिवार को सामाजिक प्रतिष्ठा दिलाने के साथ शिक्षा के महत्व को समझा। गुलामी के दौर में जब कछार जैसे सुदूर क्षेत्र में शिक्षा की सुविधा न के बराबर थी, तब उन्होंने प्राथमिक-जूनियर हाईस्कूल की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। यह उनकी दूरदर्शिता का प्रमाण था।
*पहलवानी से पीठ की सेवा तक*
अगली पीढ़ी में ख्यातिलब्ध पहलवान दादा स्व. दुर्बल यादव, निर्मल यादव, मोहित यादव, हीरा यादव और बीरबल यादव ने अपने परिश्रम से परिवार का नाम रोशन किया। स्व. हीरा यादव का रिश्ता गोरक्षपीठ से विशेष आत्मीय रहा। वे ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज के बेहद करीबी थे और परिवार के सामाजिक विस्तार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
एक स्मरणीय प्रसंग है जब महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने दादा हीरा यादव से कहा कि गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी छोटे महाराज महंत अवेद्यनाथ जी के साथ परिवार के एक बेटे को जोड़ दें। उस समय परिवार के सबसे बड़े और मशहूर पहलवान स्व. रामपति यादव कृषि विभाग में चयनित होकर प्रशिक्षण ले रहे थे, लेकिन गोरक्षपीठ और बड़े महाराज के प्रति आस्था ऐसी थी कि उन्होंने अपना जीवन पीठ की सेवा और सान्निध्य को समर्पित कर दिया। यही परंपरा हमारे परिवार और गोरक्षपीठ के बीच पीढ़ी-दर-पीढ़ी रिश्ते को मजबूत करती गई।
*आज भी जारी है परंपरा*
आज हमारी पीढ़ी वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जी महाराज के समय में इस परंपरा को आगे देख रही है। बड़े भाई बलवीर यादव भी पीठ के संरक्षण और मार्गदर्शन में परिवार की सामाजिक पहचान और इस आत्मीय रिश्ते को आगे बढ़ा रहे हैं।
समय के साथ राजनीति और परिस्थितियां बदलती हैं, लेकिन कुछ रिश्ते इन सबसे ऊपर होते हैं। गोरक्षपीठ से हमारे परिवार का रिश्ता भी आस्था, अपनत्व और पीढ़ियों की स्मृतियों से बना हुआ ऐसा ही रिश्ता है।
बड़े महाराज ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज ने हम लोगों को सदैव एक परिवार की तरह स्नेह और मार्गदर्शन दिया। उनके आशीर्वचन और सान्निध्य हमारे लिए किसी धरोहर से कम नहीं। आज उनकी पुण्यतिथि पर उन सभी स्मृतियों को नमन करते हुए मन श्रद्धा से भर उठता है। उनके विचार, उनका स्नेह और समाज के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
*ब्रह्मलीन महाराज जी को पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि…..
*रिपोर्टर – संतोष कुमार गुप्ता….
*#बुढ़ियाबारी, गोरखपुर*
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