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अलीगढ की घटनाओं पर निष्पक्ष और कानून सम्मत कदम उठाये प्रशासन…….
लखनऊ/ नई दिल्ली- 18- सितम्बर : : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भारत के राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वे उत्तर प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों में चुनावी लाभ के लिये समाज को खंड खंड करने और सनातन के नाम पर विधि और संविधान के शासन को चुनौती देने वाले भाजपा- आरएसएस और डबल इंजन सरकारों के षडयंत्रों पर रोक लगायें।
गत दिन हुयी अलीगढ की घटनाओं को इन षडयंत्रों का हिस्सा बताते हुए भाकपा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि वे चुनावी लाभ के लिये खुले आम जातीय हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं।
एक प्रेस बयान में भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डा. गिरीश ने कहा कि देश और देश के विभिन्न हिस्सों में आरएसएस/ भाजपा संरक्षित अनेक सेनायें और दल- सनातन, गौरक्षा, हिन्दू अथवा जातीय रक्षा तथा आरक्षण मिटाओ के नाम पर काम कर रही हैं। ये सेनायें खुलेआम अनुसूचित जातियों, अल्पसंख्यकों और आर्थिक व सामाजिक रूप से विपन्न तबकों के विरुद्ध घृणात्मक और हिंसक अभियान चलाती रहती हैं।
सांप्रदायिकता भड़काने में असफल होने के बाद संघ लाबी अब जातीय वैमनस्य फैलाने और दबंग समूहों के माध्यम से भय का वातावरण बनाने की कारगुजारियों को बढ़ावा दे रही है, डा. गिरीश ने कहा है।
उन्होंने कहाकि अलीगढ में गत दिन एक कथित सेनानी द्वारा वाल्मीकि समाज के खिलाफ की गयी अमर्यादित टिप्पणी के खिलाफ पुलिस- प्रशासन ने यदि तत्काल कार्यवाही की होती तो अगले दिन हुयी वारदात नहीं हुयी होती।
लेकिन राजनीतिक दवाब में पुलिस खामोश बनी रही और सामजिक विभाजन की गहरी लकीरें खिंच गयीं। हाल में ही जनपद गोंडा में भी पिछड़े वर्ग से जुड़े एक सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गयी थी। अलीगढ और गोण्डा दोनों ही जगह आक्रामक दबंगों को उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया का प्रश्रय हासिल है।
बात यहीं तक नहीं थमी होती तो भी संतोष किया जा सकता था। अलीगढ में दबंग और हमलावर तत्व दलितों को मीडिया के सामने खुलेआम चेतावनी दे रहे हैं कि “घर में घुस कर मारेंगे”। सभी जानते हैं कि इस जुमले के जनक कौन हैं!
इतना ही नहीं आक्रामक दबंग प्रशासन से लाइसेंसी हथियारों की मांग और अपने गिरोह को सुरक्षा दिये जाने की मांग भी कर रहे हैं। वे अपने प्रतिद्वंदियों को “नीले कबूतर” पुकार कर उन्हें धमकियां दे रहे हैं। जैसे कि मोदीजी अपने प्रतिद्वंदियों को “ दिमागी नक्सल” ब्रांड कर धमकियां दे चुके हैं।
कल्पना की जा सकती है कि सरकार संरक्षित इन तत्वों के हाथ में लाइसेंसी हथियार आ गये तो ये क्या क्या गुल खिलाएंगे? प्रशासन की इनके प्रति पक्षधरता से तमाम कमजोर वर्गों में भय व्याप्त है।
डा. गिरीश ने महामहिम राष्ट्रपति से उत्तर प्रदेश सहित ऐसी तमाम सरकारों और उनके प्रायोजकों पर अंकुश लगाने की मांग की जो क्षुद्र निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिये सामाजिक सौहार्द को पलीता लगा रहे हैं। उन्होंने अलीगढ के जिला प्रशासन से अपेक्षा की कि वह राजनैतिक दवाबों से मुक्त होकर दोषियों को चिन्हित कर कानून- सम्मत कार्यवाही करेगा। उन्होंने अलीगढ के प्रवुद्ध और शांतिप्रिय नागरिकों से भी अपील की कि वे अपने स्तर से सौहार्द बनाने के लिये ठोस प्रयास करें।
डा. गिरीश, राष्ट्रीय सचिव
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
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