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51 हजार युवाओं को नौकरी देकर बोले PM मोदी….
सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले 51 हजार से ज्यादा युवाओं के लिए शनिवार का दिन खास रहा. 20वें रोजगार मेले में इन युवाओं को नियुक्ति पत्र मिले. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम में हिस्सा लिया और नवनियुक्त कर्मचारियों को बधाई दी.
पीएम मोदी ने इस मौके पर नौकरी मिलने की खुशी को सिर्फ युवाओं तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने माता-पिता और परिवार की मेहनत का भी जिक्र किया. पीएम ने कहा कि इस उपलब्धि के पीछे युवाओं की मेहनत के साथ उनके परिवार की तपस्या भी है. अब असली जिम्मेदारी शुरू होती है. सरकारी सेवा में आने के बाद हर कर्मचारी का काम सीधे किसी न किसी नागरिक की जिंदगी से जुड़ता है. एक फाइल आगे बढ़ने से किसी का काम हो सकता है. एक साइन से किसी की परेशानी खत्म हो सकती है.
प्रधानमंत्री ने नए कर्मचारियों को एक और बात समझाई. उन्होंने कहा कि जिस नौकरी के लिए युवाओं ने मेहनत की है उसकी जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है. किसी बुजुर्ग की पेंशन अटक सकती है. किसी छात्र की छात्रवृत्ति का मामला हो सकता है. किसी किसान को सरकारी सहायता का इंतजार हो सकता है. ऐसे मामलों में सरकारी कर्मचारी की भूमिका सिर्फ कागज निपटाने तक सीमित नहीं रहती. उसका व्यवहार भी मायने रखता है. पीएम मोदी ने नए कर्मचारियों से ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ तेजी से काम करने की अपील की. उन्होंने कहा कि युवाओं को ऐसे फैसले लेने चाहिए जो विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करें.
एक साइन और किसी की जिंदगी बदल सकती है
रोजगार मेले में प्रधानमंत्री मोदी ने नवनियुक्त कर्मचारियों को उनकी नई जिम्मेदारी का एहसास कराया. उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में रहते हुए उनका हर फैसला आम आदमी से जुड़ सकता है. एक फाइल पर कार्रवाई किसी परिवार की परेशानी दूर कर सकती है. एक साइन किसी नागरिक के लिए नई शुरुआत बन सकता है. पीएम ने कहा कि युवाओं को कोशिश करनी चाहिए कि जिन परेशानियों से गुजरकर उन्होंने नौकरी हासिल की है वैसी परेशानी किसी दूसरे युवा को न झेलनी पड़े.
2047 के लक्ष्य में युवाओं की बड़ी भूमिका….
पीएम मोदी ने कहा कि युवा शक्ति 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं के साथ देश के स्टार्टअप और नए विचारों को लेकर दुनिया में उम्मीदें हैं. प्रधानमंत्री ने नवनियुक्त कर्मचारियों से सरकारी सेवा में रहते हुए ऐसे फैसले लेने की अपील की जो देश को आत्मनिर्भर बनाने के अभियान को आगे बढ़ाएं.
सरकारी नौकरी के साथ निजी क्षेत्र में भी बढ़ रहे मौके….
प्रधानमंत्री ने रोजगार के बदलते दायरे का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि नौकरी के अवसर सिर्फ सरकारी क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं. निजी क्षेत्र में भी नए अवसर बन रहे हैं. पीएम के मुताबिक करीब 40 देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते भारतीय कारोबारियों के लिए नए बाजार खोल रहे हैं. इससे कारोबार बढ़ने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते तैयार होने की उम्मीद है.
स्किल इंडिया और आईटीआई पर सरकार का जोर….
पीएम मोदी ने कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं का भी उल्लेख किया. उन्होंने स्किल इंडिया और नई शिक्षा नीति के साथ प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और अप्रेंटिसशिप जैसी पहलों की जानकारी दी. प्रधानमंत्री के मुताबिक 1,000 सरकारी ITI को आधुनिक बनाने के लिए 60 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया जा रहा है. सरकार का जोर युवाओं को बदलती जरूरतों के हिसाब से कौशल देने पर है.
छोटे शहरों से निकल रहे स्टार्टअप….
प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप क्षेत्र में छोटे शहरों के युवाओं की बढ़ती भागीदारी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है. पीएम के मुताबिक करीब आधे मान्यता प्राप्त स्टार्टअप अब टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं. इसका मतलब यह है कि नए कारोबार और नए विचारों का दायरा अब बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रह गया है.
पहली नौकरी से जोड़ने की योजना का भी जिक्र…
निजी क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना का भी उल्लेख किया. सरकार के मुताबिक करीब एक लाख करोड़ रुपए की इस योजना का लक्ष्य दो करोड़ युवाओं को पहली बार औपचारिक रोजगार से जोड़ना है. रोजगार मेले के मंच से पीएम ने सरकारी नौकरी के साथ निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने की कोशिशों को भी सामने रखा.
नौकरी मिली है तो जिम्मेदारी भी बड़ी है….
कार्यक्रम का सबसे खास संदेश नवनियुक्त कर्मचारियों की जिम्मेदारी को लेकर रहा. पीएम मोदी ने कहा कि नौकरी मिलना उपलब्धि है लेकिन इसके बाद सेवा का दौर शुरू होता है. उन्होंने युवाओं से ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ काम करने की अपील की. सरकारी दफ्तर में आने वाला हर व्यक्ति किसी उम्मीद के साथ आता है. किसी को पेंशन चाहिए. किसी छात्र को छात्रवृत्ति का इंतजार है. किसी किसान को सरकारी सहायता की जरूरत है. ऐसे में कर्मचारी का व्यवहार और काम करने की गति आम नागरिक के सरकार के साथ अनुभव को प्रभावित कर सकती है.
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