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दीपावली पर कुछ पंक्तियों
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ज्योतिर्मय दीपोत्सव का
आया फिर पावन पर्व
हमारा है ये मुख्य पर्व
हम सबको इस पर गर्व
दीपों का त्यौहार हमारा
लगता है हम सबको प्यारा
श्री राम जब लौटे अयोध्या
लोगों की बढ़ गई तब श्रद्धा
निश्चर मुक्त किया है धरती
जिनके ताप से तपी थी धरती
अज्ञान पर ज्ञान का प्रकाश
दीपो से भर जाता आकाश
बाकी पर्व अकेले आते
नही कोई साथी लाते
पर दिवाली नही अकेली
लाती साथ में पांच सहेली
धनतेरस है पहला पर्व
सोना चांदी गहना बर्तन
गाड़ी कार खरीदते लोग..
पूजन करते साथ में हम सब
नरक चतुर्दशी नाम है इसका…
पाप अशुद्धि है ये हरता …
उसके बाद आती दीवाली…
सजी हुई पूजा की थाली…
खुशियां हम सब साथ मानते
मिल जुल कर त्योहार मनाते
बच्चे जलाते हैं फुल झड़ी.
लग जाती पटाखों की झड़ी
भर जाता है रंग बिरंगी पतंगों आसमान
खूब उड़ाते पतंग यहां पर बच्चे बूढ़े और जवान..
फिर आई गोवर्धन पूजा…
ऐसा नहीं त्योहार कोई दूजा…
भैया दूज मनाए हम सब
बहन मिले खुश हो जाते हम सब
आओ हम सब एक ऐसा दीप जलाएं..
जो हर लें मन का अंधियारा जीवन में नई रोशनी लाए…
आर डी बाजपेई
सम्पादक
जनोदय न्यूज विज़न
हिंदी दैनिक
लखनऊ
उत्तर प्रदेश
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