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हिंदी पत्रकारिता दिवस: कलम की शक्ति से राष्ट्र जागरण और देशहित का संकल्प, पत्रकार एकता का दिया संदेश…

जेडी न्यूज़ विज़न….

आगरा : :  वर्तमान समय में सत्य, जनहित और राष्ट्रहित को केंद्र में रखकर पत्रकारिता करना किसी तपस्या से कम नहीं : वरिष्ठ पत्रकार विष्णु सिकरवार

राष्ट्रहित में कार्य करने वाले लघु एवं मध्यम समाचार पत्र प्रतिष्ठान आज भी अपेक्षित संसाधनों और सहयोग से वंचित हैं।

दूसरी ओर, आधारहीन और भ्रामक डिजिटल सामग्री के बढ़ते प्रभाव ने देशहित की पत्रकारिता के समक्ष नई और गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

विशेष रूप से देशहित में समर्पित हिंदी भाषी समाचार पत्रों और मीडिया संस्थानों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है, जिससे भविष्य में पत्रकारिता के सामने गंभीर संकट उत्पन्न होने की आशंका है।

ऐसे में आवश्यक है कि राष्ट्रहित आधारित पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा करते हुए स्वतंत्र और जिम्मेदार मीडिया को मजबूत बनाया जाए।

ऐसे समय में पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को संरक्षण, संवर्धन और सहयोग प्रदान करना केवल सरकारों का ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का भी नैतिक दायित्व है।

पत्रकारिता केवल घटनाओं का विवरण प्रस्तुत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र की दिशा एवं दशा निर्धारित करने वाली सशक्त शक्ति है।

एक मजबूत और स्वतंत्र मीडिया ही लोकतंत्र की वास्तविक ताकत होती है – राष्ट्रहित पर आधारित पत्रकारिता ही देश को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की आधारशिला है।

आगरा, । हिंदी पत्रकारिता दिवस के पावन अवसर पर वरिष्ठ देवेंद्र कुमार ने देशभर के पत्रकारों, मीडिया कर्मियों एवं समाचार पत्र प्रतिष्ठानों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्रहित, सामाजिक सरोकारों और पत्रकार एकता के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल खबरों का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने, लोकतंत्र को सशक्त बनाने और राष्ट्र निर्माण की दिशा तय करने वाली एक प्रभावशाली शक्ति है।

उन्होंने कहा कि देशहित, सुरक्षा, न्याय और सम्मान की आवाज को बुलंद करने में पत्रकारिता की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है। कलम की ताकत जनसरोकारों को सामने लाती है, समाज में जागरूकता पैदा करती है और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित पर आधारित पत्रकारिता ही देश को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की आधारशिला है।

राष्ट्रहित की पत्रकारिता आज किसी तपस्या से कम नहीं
वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र कुमारने आगे कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में निष्पक्ष, निर्भीक और पारदर्शी पत्रकारिता करने वाले पत्रकार आज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। वर्तमान समय में सत्य, जनहित और राष्ट्रहित को केंद्र में रखकर पत्रकारिता करना किसी तपस्या से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को संरक्षण, संवर्धन और सहयोग प्रदान करना केवल सरकारों का ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का भी नैतिक दायित्व है। एक मजबूत और स्वतंत्र मीडिया ही लोकतंत्र की वास्तविक ताकत होती है।

लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों के सामने गंभीर चुनौतियां
देवेंद्र कुमार ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रहित में कार्य करने वाले लघु एवं मध्यम समाचार पत्र प्रतिष्ठान आज भी अपेक्षित संसाधनों और सहयोग से वंचित हैं। दूसरी ओर, आधारहीन और भ्रामक डिजिटल सामग्री के बढ़ते प्रभाव ने पत्रकारिता के समक्ष नई और गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से हिंदी भाषी समाचार पत्रों और मीडिया संस्थानों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है, जिससे भविष्य में पत्रकारिता के सामने गंभीर संकट उत्पन्न होने की आशंका है। ऐसे में आवश्यक है कि पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा करते हुए स्वतंत्र और जिम्मेदार मीडिया को मजबूत बनाया जाए।

पत्रकारिता समाज और राष्ट्र को दिशा देने वाली शक्ति
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल घटनाओं का विवरण प्रस्तुत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र की दिशा एवं दशा निर्धारित करने वाली सशक्त शक्ति है। इसलिए लोकतंत्र की मजबूती और देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए पत्रकारिता का स्वतंत्र, निष्पक्ष और सशक्त बने रहना अत्यंत आवश्यक है।

पत्रकार एकता ही बनेगी मजबूत आवाज
अपने संदेश के अंत में वरिष्ठ पत्रकार तहसील अध्यक्ष पूर्व देवेंद्र कुमार ने सभी पत्रकारों से एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि संगठित और मजबूत पत्रकार समाज ही अपने अधिकारों, हितों और सरोकारों की प्रभावी पैरवी कर सकता है। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर सभी पत्रकारों से राष्ट्रहित, सामाजिक उत्तरदायित्व और पत्रकार एकता के प्रति समर्पित रहने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा, “जब पत्रकार समाज एकजुट होगा, तभी उसकी आवाज अधिक प्रभावशाली बनेगी और पत्रकार हितों की रक्षा के लिए मजबूत आधार तैयार होगा।”

आखिर में वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र कुमारने कहा कि “राष्ट्रहित, सत्य और जनसेवा की पत्रकारिता ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है। आइए, हिंदी पत्रकारिता दिवस पर हम सभी राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सरोकारों और पत्रकार एकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करें।”

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