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पति-पत्नी के सामंजस्य से ही सुखी होता है परिवार : अच्युतानंद शास्त्री

जेडी न्यूज़ विज़न….

सन्तोष कुमार गुप्ता……
गोरखपुर: : कौड़ीराम: :  सिद्ध पीठ बाबा बम्बनाथ मंदिर परिसर पाण्डेपार में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के चौथे दिन कथा व्यास आचार्य पंडित अच्युतानंद शास्त्री ने शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए दांपत्य जीवन में परस्पर सम्मान, विश्वास और समर्पण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा पति-पत्नी के बीच सामंजस्य और सम्मान ही सुखी एवं संस्कारित परिवार की नींव है।
कथावाचक ने कहा पत्नी के लिए मन, वचन और कर्म से पति का सम्मान और सेवा सर्वोच्च धर्म माना गया है। जो पत्नी पति के मनोभावों को बिना कहे समझकर उसके अनुरूप आचरण करती है, वह पूर्व जन्मों के पुण्यों का फल होती है। वहीं उन्होंने पुरुषों को भी नसीहत देते हुए कहा कि जो पति पत्नी से सम्मान की अपेक्षा करता है, उसे स्वयं भी पत्नी का सम्मान करना चाहिए। परिवार में प्रेम और सम्मान का वातावरण ही रिश्तों को मजबूत बनाता है। पत्नी का अपमान करने वाला व्यक्ति जीवन में कभी न कभी स्वयं भी अपमान का भागी बनता है।
रामकथा के आध्यात्मिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि श्रद्धा और विश्वास के साथ रामकथा का श्रवण करने से मनुष्य का अंतःकरण निर्मल होता है तथा उसे जीवन के संघर्षों से उबरने की शक्ति प्राप्त होती है। रामकथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाली दिव्य धारा है। इसके श्रवण से व्यक्ति को भक्ति, मर्यादा और सदाचार का मार्ग मिलता है।
कथा प्रारंभ होने से पूर्व मुख्य यजमान गुलाब रध्वज उर्फ महंथ सिंह ने व्यासपीठ का पूजन एवं आरती कर कथा का शुभारंभ कराया। कथा में परिवहन निगम के उपक्षेत्रीय प्रबंधक महेश राय, हिंदू युवा वाहिनी के पूर्व जिलाध्यक्ष नरेंद्र ध्वज सिंह, भाजपा बांसगांव मंडल अध्यक्ष अश्वनी राय, अखिलेश सिंह, जिला पंचायत सदस्य विशाल ध्वज सिंह, श्रवण यादव, राजेश पटेल, आकाश सिंह, राजेश पाल, दिवाकर सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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