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ग्राम नाहिल (तहसील पुवायां) में सरकारी जमीन की खुली डकैती, फर्जी
नगर (संजय नगर)बसाने और पेट्रोल पंप लगने तक की पाप कथा –
महाघोटाला: तत्कालीन एडीएम के आदेश को ठेंगा, 250 एकड़ सरकारी जमीन पर बस गया फर्जी ‘संजय नगर’ और पेट्रोल पंप!
पुवायां (शाहजहांपुर) : :
भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा देखनी हो, तो शाहजहांपुर जिले की तहसील पुवायां के ग्राम नाहिल चले आइए। यहाँ कानून की धज्जियां उड़ाने का ऐसा खेल खेला गया है, जिसके आगे बड़े से बड़ा भू-माफिया भी शर्मा जाए।
जिस 250 एकड़ जंगल, झाड़ी और ऊसर-बंजर सरकारी जमीन को दिनांक 25 अगस्त 2001 को ही तत्कालीन एडीएम- भवनाथ सिंह जी (वित्त एवं राजस्व) ने कड़ा आदेश जारी कर खारिज (निरस्त) कर दिया था और दोषियों पर ( FIR ) करने के आदेश दिए थे। उसे तहसील के भ्रष्ट कर्मचारियों ने अपनी ‘जादुई कलम’ और ‘अंधे लालच’ के दम पर न सिर्फ जिंदा कर दिया, बल्कि उसे रसूखदारों के नाम पर चढ़ाकर अरबों का साम्राज्य खड़ा करवा दिया।
सरकारी जंगल उजाड़कर बसा दिया ‘संजय नगर`
यह महज़ कागजी हेरफेर नहीं, बल्कि धरती पर कब्जा करने की नग्न साजिश है। एडीएम के आदेश को कूड़ेदान में डालकर, राजस्व कर्मियों की सांठगांठ से इस 250 एकड़ सरकारी जमीन पर फर्जी नगर (संजय नगर) नाम का एक पूरा का पूरा फर्जी और अवैध नगर बसा दिया गया।
और नाहिल के फर्जी ईमानदार और धार्मिक लोगों ने करोड़ों रुपए के लोन बैंक से निकलकर खुद कर बारे न्यारे कर लिए।
सवाल यह है कि: जब जमीन सरकारी थी, तो वहां धड़ल्ले से निर्माण कैसे हो गया?
प्रशासन कहाँ सोया था- बिजली के कनेक्शन, रास्ते और अवैध कॉलोनियां कटती रहीं, लेकिन तहसील के रक्षकों की आँखों पर रिश्वत की पट्टी बंधी रही।
सरकारी बंजर पर दहाड़ रहा है ‘इंडियन ऑयल का पेट्रोल पंप’
इस घोटाले का सबसे चौंकाने वाला और दुस्साहसिक पहलू यह है कि इस विवादित और खारिज हो चुकी सरकारी जमीन पर *इंडियन ऑयल (IOCL) का एक पेट्रोल पंप* भी खड़ा कर दिया गया है।
* एक सरकारी तेल कंपनी को एनओसी (NOC) देने के लिए राजस्व विभाग के किन-किन अधिकारियों ने अपनी आत्मा और सरकारी नियमों का सौदा किया?
* क्या एनओसी जारी करने से पहले 2001 के एडीएम कोर्ट के आदेश की फाइल को जानबूझकर दबा दिया गया?
यह सीधे तौर पर कॉरपोरेट और भ्रष्ट तंत्र का ऐसा गठजोड़ है जो कानून को अपनी जेब में लेकर चलता है।
घोटाले का कच्चा-चिट्ठा –
घोटाला स्थल – ग्राम नाहिल, तहसील पुवायां, जिला शाहजहांपुर –
जमीन का रकबा व स्वरूप| लगभग 250 एकड़ (जंगल, झाड़ी, ऊसर व बंजर भूमि)
ऐतिहासिक आदेश -25/08/2001 को एडीएम (F&R) द्वारा आवंटन/पट्टा पूरी तरह खारिज एवं दोषियों पर FIR करवाने का आदेश
वर्तमान अवैध साम्राज्य
अवैध रूप से बसाया गया ‘संजय नगर’
*इंडियन ऑयल* का पेट्रोल पंप
मुख्य आरोपी – पुवायां तहसील के राजस्व कर्मचारी, भू-माफिया और अपात्र कब्जाधारक
अब सिर्फ जांच नहीं, ‘बुलडोजर’ और ‘जेल’ की जरूरत है!
यह मामला उत्तर प्रदेश सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति की छाती पर मूंग दलने जैसा है। 25 साल पहले जो जमीन सरकारी घोषित हो चुकी थी, उस पर आज निजी लोग मलाई काट रहे हैं।
सोचिए:अगर आम आदमी एक इंच सरकारी नाली पर पैर रख दे, तो प्रशासन का डंडा तुरंत चल जाता है। लेकिन यहाँ 250 एकड़ का “जंगल और बंजर” निगल लिया गया, पूरा नगर बस गया, पेट्रोल पंप चालू हो गया, और जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों में बैठकर फाइलों पर धूल जमाते रहे।
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*फर्जी इंद्राज तुरंत निरस्त हों:-क्या शासन इस 250 एकड़ जमीन को वापस सरकारी खाते में दर्ज कर ‘संजय नगर’ के अवैध आकाओं पर कार्रवाई करेगा?….
जेल भेजे जाएं भ्रष्ट कर्मी और अपात्र कब्जाधारक:- जिन कर्मचारियों और अधिकारियों ने 2001 के आदेश को छुपाकर फर्जी नाम चढ़ाए, उनकी संपत्तियां कुर्क कर उन्हें जेल भेजा जाए।
यह शाहजहांपुर के इतिहास का सबसे बड़ा भू-घोटाला साबित हो सकता है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री के सख्त आदेशों के बाद पुवायां का यह ‘संजय नगर’ और ‘पेट्रोल पंप’ कब जमींदोज होता है और भ्रष्ट तंत्र पर कानून का हंटर कब चलता है!
वाह रे छोटी काशी नाहिल के बेईमानों की जमीन की भूख – कहानी अभी बाकी है
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