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बहू–बेटी सम्मेलन के लिए मास्टर ट्रेनर्स का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू….

जेडी न्यूज विजन….

सन्तोष कुमार गुप्ता…..

.पुलिस–यूनिसेफ की संयुक्त पहल, चार जिलों में महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा मजबूत करने पर फोकस….

गोरखपुर : :

मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा को संस्थागत रूप से सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से “बहू–बेटी सम्मेलन” कार्यक्रम के लिए मास्टर ट्रेनर्स की तीन दिवसीय आवासीय कार्यशाला गुरुवार से होटल कोर्टयार्ड बाय मैरियट, गोरखपुर में शुरू हुई। यह कार्यशाला 11 से 13 जून 2026 तक गोरखपुर जोन पुलिस और यूनिसेफ उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है।

इस प्रशिक्षण में मॉडल के रूप में चयनित चार जनपद—गोरखपुर, महराजगंज, संत कबीर नगर और बलरामपुर—के चयनित मास्टर ट्रेनर्स भाग ले रहे हैं। कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों की क्षमता संवर्धन कर उन्हें कार्यक्रम की अवधारणा, कार्यप्रणाली और प्रभावी क्रियान्वयन की रणनीतियों से प्रशिक्षित करना है, ताकि वे अपने-अपने जिलों में इस पहल को सफलतापूर्वक लागू कर सकें।

कार्यशाला के मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक, गोरखपुर जोन श्री मुथा अशोक जैन रहे। विशिष्ट अतिथियों में पुलिस उपमहानिरीक्षक गोरखपुर परिक्षेत्र श्री शिवशिम्पी चनप्पा, जिलाधिकारी गोरखपुर श्री दीपक मीणा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ, यूनिसेफ के चीफ ऑफ फील्ड ऑफिस डॉ. ज़कारी एडम तथा बाल संरक्षण विशेषज्ञ श्री सैय्यद मंसूर उमर कादरी शामिल रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

यूनिसेफ के बाल संरक्षण विशेषज्ञ सैय्यद मंसूर उमर कादरी ने बताया कि “बहू सम्मेलन” के रूप में शुरू हुई यह पहल अब “बहू–बेटी सम्मेलन” के रूप में विकसित होकर महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी व व्यवस्थित बनाया गया है। वर्तमान में 44 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जो आगे 50 ब्लॉकों में करीब 500 ब्लॉक स्तरीय और 18 हजार से अधिक ग्राम पंचायत स्तरीय प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ ने कहा कि यह पहल समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि अब पुलिस केवल अपराध के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि जागरूकता और रोकथाम पर भी कार्य कर रही है, जिससे पुलिस सामाजिक परिवर्तन की भागीदार बन रही है।

यूनिसेफ के डॉ. ज़कारी एडम ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सभी विभागों और समुदाय की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रगति के बावजूद अभी कई क्षेत्रों में काम करने की जरूरत है।

पुलिस उपमहानिरीक्षक शिवशिम्पी चनप्पा ने बताया कि मिशन शक्ति के तहत इस पहल को और व्यापक बनाया गया है, जिसमें विभिन्न विभागों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। वहीं, मुख्य अतिथि श्री मुथा अशोक जैन ने कहा कि “बहू–बेटी सम्मेलन” महिलाओं के सशक्तिकरण और अपराध की रोकथाम के लिए एक प्रभावी मंच है। उन्होंने सभी मास्टर ट्रेनर्स को इस पहल का एम्बेसडर बताते हुए आगामी महीनों में माइक्रो प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन का आह्वान किया।

तीन दिवसीय इस कार्यशाला में पुलिस, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम्य विकास, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि भी प्रतिभाग कर रहे हैं। आयोजन के माध्यम से गांव-गांव तक जागरूकता फैलाने और महिलाओं व बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

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