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कोचिंग सेंटर बना लाक्षागृह… 15 की जलकर दर्दनाक मौत.. लाशें हुईं टुकड़े – टुकड़े….

जेडी न्यूज विजन….

लखनऊ अग्निकांड: 2016 में ध्वस्त की जानी थी यह इमारत, 10 साल बाद 15 लोगों की गई जान …. 10 बड़ी बातें….

लखनऊ  : :राजधानी के अलीगंज इलाके में सोमवार को तीन मंजिला इमारत में आग लगने के कारण झुलसने से 15 लोगों की मौत हो गई जबकि नौ लोग घायल हो गए. पुलिस ने इस मामले में इमारत के मालिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है जबकि लापरवाही बरतने के आरोप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।

पीएम मोदी ने घटना को लेकर दुख जताया है.

मामले की पड़ताल के लिये विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गयी है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस घटना में लोगों की मौत पर दुख जाहिर करते हुए मृतकों के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है।

वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मृतकों के परिजन को पांच—पांच लाख तथा घायलों को 50—50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की है. इस घटना की 10 बड़ी बातों पर नजर डालते हैं.

आग की घटना के 10 बड़े अपडेट

  1. लखनऊ अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री ने अपने सारे कार्यक्रम रद्द कर अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की.
  2. घटना को लेकर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया.
  3. एसआईटी को सात दिन में रिपोर्ट सौंपने के आदेश
  4. सीएम योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घटनास्थल का दौरा किया.
  5. हादसे की शिकार तीन मंजिला इमारत को 2016 में ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था.
  6. दो महीने से कम समय में ही ध्वस्त करने का आदेश रद्द कर दिया गया था.
  7. आग हादसे के बाद इमारत के मालिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया.
  8. 11 घायलों में से 9 को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है.
  9. जिस बिल्डिंग में आज आग लगी उस बिल्डिंग का मानचित्र पास था, लेकिन निर्माण उसके विपरीत किया गया था.
  10. मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख के मुआवजे का ऐलान किया गया.

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार (22 जून) को आग हादसे की शिकार हुई तीन मंजिला इमारत को साल 2016 में ध्वस्त किया जाना था. हालांकि, दो महीने बाद ही इस आदेश को निरस्त कर दिया गया. दरअसल, जिस इमारत में आग लगी उसके खिलाफ 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था, लेकिन दो महीने से कम समय में ही उस आदेश को निरस्त भी कर दिया गया था. अब इमारत से जुड़े पुराने दस्तावेज और लखनऊ विकास प्राधिकरण की कार्रवाई गंभीर सवालों के घेरे में है।

हादसे को लेकर अब तक क्या एक्शन हुआ?

हादसे के बाद प्रशासन लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और हादसे के दोषियों के खिलाफ बेहद सख्त नजर आ रहा है. हादसे को लेकर मुख्यमंत्री के आदेश पर जानकीपुरम में बिजली विभाग के अधिकारी गौरव कुमार, अग्निशमन विभाग की इंदिरा नगर शाखा के अधिकारी कमलेन्द्र कुमार सिंह, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के सहायक अभियंता अनिल कुमार और कनिष्ठ अभियंता प्रमोद पांडेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.

पुलिस ने हादसे के बाद चार लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए लोगों में राम कृष्ण उपाध्याय (43), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (62), तुषार कृष्ण जायसवाल (31) और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं. उपाध्याय, शुक्ला और जायसवाल आग की जद में आयी इमारत के संयुक्त रूप से मालिक थे।

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