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(सुरेन्द्र कुमार वर्मा )
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में स्थित श्री नाग देवता मंदिर, मंजीठा जहां इस मन्दिर का एक लंबा और पौराणिक इतिहास है। यह स्थान नाग संप्रदाय के तपस्वी ‘नागदास बाबा’ की तपोस्थली और महात्मा बुद्ध से जुड़ी किंवदंतियों के लिए प्रसिद्ध है। यहां आषाढ़ पूर्णिमा से लेकर नागपंचमी तक विशाल मेला लगता है इस मेले में दूर-दूर से श्रद्धालु आते है इस मन्दिर का ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि महात्मा बुद्ध से जुड़ा प्रसंग: स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जिस जगह आज नाग देवता का मंदिर है, वहां पहले घना जंगल हुआ करता था और एक बहुत विषैला सर्प रहता था। कहते हैं कि एक बार साधु वेश में महात्मा गौतम बुद्ध वहाँ से गुजरे और उन्होंने उस सर्प को दूध पिलाकर उसे शांत किया था नागदास बाबा और नाग संप्रदाय: ऐतिहासिक रूप से माना जाता है कि यहाँ नाग संप्रदाय के एक संत ‘नागदास बाबा’ रहते थे। उन्होंने ग्रामीणों को नाग देवता की महिमा बताई और तालाब में स्नान करके मिट्टी के पात्र (मठिया) में दूध और चावल नाग देवता को अर्पित करने की परंपरा शुरू की बाद में उन्हीं की समाधि भी मंदिर परिसर में बनाई गई।
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