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(सुरेन्द्र कुमार वर्मा)
चंडीगढ़ : (हरियाणा ): : देश के किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, युवाओं तथा आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से किसान भवन, सेक्टर-35ए, चंडीगढ़ में विभिन्न किसान, मजदूर, छात्र, युवा एवं सामाजिक संगठनों की एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में देशभर के अनेक प्रमुख संगठनों एवं संघर्षशील मंचों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सर्वसम्मति से इस मंच का नाम “देश बचाओ मोर्चा” रखा गया।*
*बैठक में केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे भारत–अमेरिका व्यापार समझौते का कड़ा विरोध करते हुए इसे हर हाल में रद्द करवाने का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि यह समझौता देश के किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों, युवाओं तथा देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए गंभीर खतरा है।*
*बैठक में निम्नलिखित प्रमुख मांगों पर संयुक्त संघर्ष चलाने का निर्णय लिया गया—*
*भारत–अमेरिका व्यापार समझौता तत्काल रद्द किया जाए।*
*स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सी2+50% फार्मूले पर सभी फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए।*
*किसानों की संपूर्ण कर्जमुक्ति सुनिश्चित की जाए।*
*जल संरक्षण, जल प्रबंधन एवं राष्ट्रीय जल नीति को प्रभावी ढंग से लागू कर देश के जल संकट का स्थायी समाधान किया जाए।*
*किसानों को उनकी उपज का लाभकारी एवं सुनिश्चित मूल्य दिया जाए आदि।*
*इन मांगों को लेकर देश बचाओ मोर्चा ने घोषणा की कि 21 जुलाई 2026 को दिल्ली के किसान घाट पर एक दिवसीय विशाल देशव्यापी आंदोलन एवं जनसभा आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर से किसान, मजदूर, कर्मचारी, विद्यार्थी, युवा तथा विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में भाग लेंगे।*
*आंदोलन की तैयारियों के तहत 15 जुलाई 2026 को पूरे देश में तहसील, ब्लॉक एवं जिला स्तर पर मोटरसाइकिल मार्च निकाले जाएंगे तथा भारत के प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे, ताकि गांव-गांव तक जनजागरण अभियान चलाया जा सके।*
*बैठक में आंदोलन के संचालन एवं आगामी कार्यक्रमों के समन्वय के लिए छह सदस्यीय समिति का गठन किया गया, जिसमें गुरनाम सिंह चढूनी, सरवन सिंह पंधेर, वी.एम. सिंह, सरजीत सिंह फूल, प्रकाश पोहरे जी तथा शिव कुमार कक्का को जिम्मेदारी सौंपी गई।*
*देश बचाओ मोर्चा ने देश के किसानों, मजदूरों, विद्यार्थियों, युवाओं तथा सभी देशवासियों से आह्वान किया कि वे 21 जुलाई 2026 को दिल्ली के किसान घाट पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस ऐतिहासिक जनआंदोलन को सफल बनाएं तथा देश, खेती, रोजगार, प्राकृतिक संसाधनों और जनहित की रक्षा के लिए एकजुट होकर अपनी भागीदारी निभाएं।*
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