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लखनऊ : : राजधानी में अलीगंज के सेक्टर-डी में भूखण्ड संख्या 102 पर बनी जिस बिल्डिंग में आग से 15 की मौत हो गयी थी अब उसके ध्वस्तीकरण की उल्टी गिनती शुरू हो गयी है। लखनऊ विकास प्राधिकरण के विहित प्राधिकारी अतुल कुमार ने ने शुक्रवार को इसके ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया।
बिल्डिंग के मालिक को इसे स्वयं गिराने के लिए 15 दिन की मोहलत दी गयी है। उक्त अवधि में निर्माण नहीं तोड़ने पर प्राधिकरण इसे स्वयं गिराएगा। इसके बाद ध्वस्तीकरण में होने वाला समस्त खर्च मालिक से वसूला जाएगा। लखनऊ विकास प्राधिकरण के जोनल अधिकारी माधवेश कुमार ने शुक्रवार की शाम को टीम के साथ मौके पर पहुंचकर बिल्डिंग में ध्वस्तीकरण की नोटिस चस्पा कर दी।
लखनऊ विकास प्राधिकरण के सचिव विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि वीरेन्द्र शुक्ला, सुरेन्द्र शुक्ला व अन्य द्वारा अलीगंज के सेक्टर-डी में भूखण्ड संख्या-एम0एस0-102 पर अवैध रूप से व्यावसायिक भवन का निर्माण कराया था। जिसके विरूद्ध विहित प्राधिकारी ने 23 जून को उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम की धारा-27(1) के तहत नोटिस जारी किया था। इसमें विपक्षी को स्थल पर किये गये निर्माण कार्य की वैद्यता के सम्बंध में 15 दिन के अंदर साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गये थे। उक्त नोटिस स्थल पर चस्पा करने के साथ ही इसकी प्रति विपक्षी को जेल में भी प्राप्त करायी गयी थी।
07 जुलाई को विहित प्राधिकारी न्यायालय में प्रकरण की पहली सुनवायी की गयी। जिसमें विपक्षी के अधिवक्ता की अपील पर आपत्ति दर्ज करने के लिए एक दिन का समय दिया गया। विपक्षी के अधिवक्ता द्वारा अगले दिन 8 जुलाई को न्यायालय के समक्ष आपत्ति दर्ज करायी गयी। उक्त आपत्ति पर प्रवर्तन जोन-4 द्वारा जवाब दाखिल किया गया। नौ जुलाई को विहित प्राधिकारी न्यायालय ने सुनवाई पूरी करते हुए फैसला रिजर्व कर लिया था। 10 जुलाई को विहित प्राधिकारी न्यायालय द्वारा व्यावसायिक निर्माण कार्य को अवैध घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश पारित किये गये हैं। प्रवर्तन जोन-4 के जोनल अधिकारी ने टीम के साथ मौके पर जाकर अवैध बिल्डिंग पर आदेश की प्रति चस्पा कर दी है।
22 जून को अग्निकांड में हुई थी 15 युवाओं की मौत
इस बिल्डिंग में आग लगने से 22 जून को 15 युवाओं की मौत हो गयी थी। बिल्डिंग का नक्शा आवासीय पास था। लेकिन इसके मालिकों ने इसे अवैध व व्यावसायिक बना लिया था। सेट बैक से लेकर सभी चीजें अवैध थी। एलडीए को अग्निकांड के बाद इसकी जानकारी हुई। इसमें पता चला कि प्राधिकरण के तत्कालीन अधिकारियों ने वर्ष 2016 से पहले इसके ध्वस्तीकरण का आदेश ही वापस ले लिया था। अगर उस समय अधिकारियों ने आदेश वापस न लिया तो बिल्डिंग गिर गयी होती और इस तरह 15 बेगुनाह युवाओं की जान न जाती।
बिल्डिंग को तोड़ने से बचाने के लिए लगी है वकीलों की फौज
इस बिल्डिंग को ध्वस्तीकरण से बचाने के लिए वकीलों की फौज लगी है। एलडीए में वकीलों ने नए बिल्डिंग बाईलाज का हवाला देते हुए इसे बचाने की भरपूर कोशिश की। तर्क दिया कि इसे गिराने की बजाय इसकी कम्पाउंडिग की जाए।
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