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इंदौर: :मध्यप्रदेश में बारिश के मौसम के साथ ही बिजली दुर्घटनाओं के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिससे लाइन पर काम करने वाले कर्मचारियों की जान जोखिम में पड़ रही है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए ‘मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन’ के महामंत्री राकेश डी पी पाठक ने ऊर्जा सचिव और सभी बिजली कंपनियों (पूर्व, मध्य, पश्चिम क्षेत्र वितरण कंपनियों तथा पावर ट्रांसमिशन कंपनी) के प्रबंध संचालकों से सख्त कदम उठाने का अनुरोध किया है।
फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी.पी. पाठक ने बताया कि बरसात, आंधी और जलभराव जैसी विपरीत परिस्थितियों में कर्मचारी 40 फुट ऊंचे खंभों और सब-स्टेशनों पर काम करते हैं। ऐसे में फिसलने, ऊंचाई से गिरने या करंट लगने का डर हमेशा बना रहता है। इसके बावजूद कई स्थानों पर जरूरी सुरक्षा उपकरणों का अभाव है, और कार्य के परमिट लेने व निरस्त करने में सामंजस्य की कमी के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं।
सुरक्षा मानकों और प्रशिक्षण की मांग –
फेडरेशन ने मांग की है कि नियमित, संविदा और विशेषकर आउटसोर्स कर्मियों को काम पर भेजने से पहले निम्नलिखित मानक गुणवत्ता वाले उपकरण अनिवार्य रूप से दिए जाएं:
इंसुलेटेड टूल्स: शॉक-प्रूफ हैंडटूल्स, पेचकस, प्लास और 11KV/33KV के इंसुलेटिंग रबर ग्लव्स।
निजी सुरक्षा उपकरण (PPE): सेफ्टी हेलमेट, इंसुलेटेड जूते, स्टे रॉड, सेफ्टी बेल्ट, रिफ्लेक्टिव जैकेट, रेनकोट, गमबूट, फेस शील्ड और टॉर्च।
इसके अलावा, बिजली खंभों पर काम करते समय अर्थिंग को अनिवार्य करने तथा किसी भी कार्य से पहले विधिवत ‘परमिट टू वर्क’ लेने पर जोर दिया गया है।
फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि विद्युत अधिनियम 2003 के तहत कर्मचारियों को सुरक्षित माहौल देना नियोक्ता और प्रबंधन की कानूनी जिम्मेदारी है। कंपनियों और आउटसोर्स एजेंसियों को इन सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण देना चाहिए, और प्रभारी अधिकारियों को समय-समय पर इसका औचक निरीक्षण करना चाहिए। यह जानकारी प्रदेश प्रवक्ता मदन वर्मा द्वारा दी गई।
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