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जीवन एक उत्सव है, प्रेम और सेवा ही सच्चा सुख है : परम पूज्य स्वामी आनंद सरस्वती जी महाराज

Jdnews Vision….

(राघवेन्द्र मिश्रा )

मैनेजिंग एडिटर…..

विशाखापट्टनम : : परम पूज्य स्वामी आनंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि मनुष्य का जीवन ईश्वर का अमूल्य उपहार है। इसे केवल अपने लिए नहीं, बल्कि परिवार, समाज, राष्ट्र और समस्त मानवता के कल्याण के लिए जीना ही जीवन की वास्तविक सार्थकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन स्वयं से प्रश्न करना चाहिए— “मैं क्यों जी रहा हूँ और किसके लिए जी रहा हूँ?” यही प्रश्न जीवन के उद्देश्य का मार्ग प्रशस्त करता है।

स्वामी जी ने कहा कि सच्चा सुख (सुखम्) धन, पद, वैभव और भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि मन की शांति, संतोष, प्रेम, सेवा, करुणा, सदाचार और ईश्वर-स्मरण में निहित है। मनुष्य का जन्म केवल खाने, कमाने और भोग-विलास के लिए नहीं, बल्कि आत्मविकास, सद्कर्म, मानव सेवा तथा ईश्वर की ओर अग्रसर होने के लिए हुआ है।

 

उन्होंने कहा कि हम केवल अपने परिवार तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी जाति, समाज, राष्ट्र और इस संपूर्ण पृथ्वी पर रहने वाले प्रत्येक मानव को अपना मानें। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना ही मानव जीवन का सर्वोच्च आदर्श है। प्रेम, सहयोग और सेवा का भाव ही समाज को सशक्त और सुखी बनाता है।

परम पूज्य स्वामी आनंद सरस्वती जी ने सकारात्मक जीवन का संदेश देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन यह संकल्प लेना चाहिए—”मैं सदैव स्वस्थ हूँ, समृद्ध हूँ, बुद्धिमान हूँ और सफल हूँ।”उन्होंने कहा कि सकारात्मक विचार, गुरु का आशीर्वाद, ईश्वर में आस्था और सत्कर्म जीवन को सफलता एवं आनंद की ओर ले जाते हैं।

स्वामी जी ने कहा कि “जीवन एक उत्सव है। मुस्कुराइए, हँसिए, गाइए और नृत्य कीजिए।” प्रसन्नता, कृतज्ञता और सकारात्मक सोच से जीवन आनंदमय बनता है। जहाँ प्रेम, शांति और सेवा का भाव होता है, वहीं ईश्वर का वास होता है।

इस अवसर पर तेलुगु ‘विशाखा समाचारम्’ के प्रधान संपादक श्री वीरभद्र राव गरु तथा हिंदी संस्करण के कार्यकारी संपादक श्री राघवेन्द्र मिश्रा ने परम पूज्य स्वामी आनंद सरस्वती जी महाराज का शॉल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया।

इस गरिमामयी अवसर पर श्री नुक्काला सूर्य प्रकाश गरु एवं श्री भास्कर राव गरु भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी ने स्वामी जी के प्रेरणादायी विचारों को समाज में जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प व्यक्त किया।

कार्यक्रम का समापन मानव सेवा, आध्यात्मिक जागरण तथा विश्वबंधुत्व के संदेश के साथ हुआ।

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