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संवाददाता…
हितेश कुमार जोशी
14 माह से काउंसलिंग का इंतजार, 471 यथावत प्रधानाचार्यों में बढ़ रही निराशा◼️ वरिष्ठता विवाद नहीं, फिर भी अटकी प्रक्रिया
◼️ अलग से काउंसलिंग कर रिक्त विद्यालयों में शीघ्र पदस्थापन की उठी मांग◼️
सिरोही – राजस्थान शिक्षा विभाग में यथावत प्रधानाचार्य के रूप में कार्यरत 471 अधिकारियों को पिछले लगभग 14 माह से काउंसलिंग का इंतजार करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इन अधिकारियों के संबंध में न तो कोई वरिष्ठता विवाद लंबित है और न ही इनका कोई प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है, इसके बावजूद काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू नहीं होने से प्रदेश के सैकड़ों विद्यालय स्थायी प्रधानाचार्य से वंचित हैं।राजस्थान राज्य कर्मचारी महासंघ के पुर्व संयुक्त प्रदेश महामंत्री गोपाल सिंह राव पोसालिया ने बताया कि वर्ष 2017-18 से 2020-21 की अवधि के लिए गठित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) द्वारा प्रधानाध्यापक (माध्यमिक विद्यालय) के छाया पदों की रिव्यू डीपीसी कर 471 प्रधानाध्यापकों एवं उप प्रधानाचार्यों का चयन किया गया था। इन अधिकारियों की वरिष्ठता पर किसी प्रकार का विवाद नहीं था तथा इन्हें निदेशक माध्यमिक शिक्षा, राजस्थान, बीकानेर द्वारा पृथक काउंसलिंग के माध्यम से पदस्थापित किया जाना था।बाद में उप प्रधानाचार्य से प्रधानाचार्य पद की रिव्यू डीपीसी में प्राध्यापक से उप प्रधानाचार्य बने कार्मिकों को भी शामिल कर लिया गया।

इन कार्मिकों की वरिष्ठता से जुड़ा मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। मई 2025 में उन्हें यथावत प्रधानाचार्य पद पर कार्यग्रहण भी करा दिया गया, जबकि 471 यथावत प्रधानाचार्यों का मामला पूरी तरह अलग और विवाद रहित है। राजस्थान राज्य कर्मचारी महासंघ भामसं के जिला अध्यक्ष दशरथ सिंह भाटी के अनुसार जिन अधिकारियों का कोई न्यायिक या वरिष्ठता संबंधी विवाद नहीं है, उन्हें न्यायालय में लंबित अन्य प्रकरणों के कारण अनावश्यक रूप से प्रतीक्षा कराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि इन 471 प्रधानाचार्यों की अलग से काउंसलिंग कर दी जाए तो प्रदेश के 471 विद्यालयों को नियमित प्रधानाचार्य मिल सकेंगे, जिससे शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। कर्मचारी नेता गोपाल सिंह राव पोसालिया ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर तथा शिक्षा निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, बीकानेर से मांग की है कि 471 विवाद-मुक्त यथावत प्रधानाचार्यों की पृथक काउंसलिंग शीघ्र आयोजित कर उन्हें रिक्त विद्यालयों में पदस्थापित किया जाए, ताकि लंबे समय से लंबित इस मामले का समाधान हो सके और विद्यालयों को नियमित नेतृत्व मिल सके।
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