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ग्रेटर नोएडा: : यहां स्थित ग्राम नियाना से आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर की ओर से आयोजित किए जाने वाले चतुर्वेद पारायण यज्ञों की श्रृंखला का शुभारंभ हुआ। महाशय हेमसिंह आर्य जी के आवास पर आयोजित किए गए कार्यक्रम को राष्ट्र रक्षा और धर्म रक्षा का नाम दिया गया, जिसे आर्य प्रतिनिधि सभा गौतम बुद्धनगर के तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे आर्य प्रतिनिधि सभा गौतम बुद्ध नगर के प्रधान और आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश कि न्याय सभा के प्रधान न्यायाधीश डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि
राष्ट्र रक्षा के लिए हमको घरों का परिवेश सुधारना पड़ेगा, वैसे ही घर में भी दो थानेदार नहीं हो सकते। पति को पति और पत्नी को पत्नी बनकर रहना पड़ेगा। दुर्भाग्य से आज पति-पत्नी दोनों एक दूसरे पर थानेदारी दिखा रहे हैं। यदि सास ससुर हैं तो वह भी अपने आप को थानेदार मान रहे हैं, इस प्रकार की व्यवस्था से घरों का माहौल बिगड़ रहा है।
जिसके कारण परिवार टूट रहे हैं। इसी सोच और कार्यशैली का प्रभाव राष्ट्र में विखंडनकारी शक्तियों के प्रादुर्भाव में देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमें यज्ञ की पवित्र भावना को मन में बसना पड़ेगा और एक दूसरे के लिए समर्पित होकर काम करने की शैली अपनानी पड़ेगी। इसी प्रकार की कार्य शैली में धर्म का निर्वाह अपने आप हो जाता है, यह धर्म ही अंत में राष्ट्र रक्षा के लिए उपयोगी बन जाता है। डॉ आर्य ने कहा कि लिव इन रिलेशनशिप हमारे परिवार की भावनाओं को चोट पहुंचा रहा है । भारतीय परंपरा के विपरीत अपनाई जाने वाली यह जीवन शैली हमारे जीवन मूल्यों का विनाश कर रही है, जिससे राष्ट्र और धर्म दोनों की क्षति हो रही है।
योजनाबद्ध तरीके से हमारे लड़के लड़कियों को शादी न करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे आने वाले कल में सनातनी समाज अपने आप नष्ट हो जाएगा। इस योजना पर काम करने वाले लोगों को समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण जी ने गीता में कहा है कि मैं धर्म की रक्षा के लिए बार-बार जीवन लेना पसंद करूंगा इसका अभिप्राय है कि धर्म रक्षा और राष्ट्र रक्षा जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके लिए किसी भी सुख को तिलांजलि दी जा सकती है।

डॉ आर्य ने कहा कि नारी को हमारे यहां पर सरस्वती अनुमति और राका के नाम से पुकारा गया है । जब हम सरस्वती वंदना करते हैं तो उस मातृ शक्ति का सम्मान करते हैं जो राष्ट्र के लिए सुसभ्य और सुशिक्षित संतान का निर्माण कर अपनी कोख को ही त्रिवेणी बना देती है।
इस अवसर पर भाषा प्रचारिणी सभा गौतम बुद्ध नगर के जिलाध्यक्ष ब्रह्मचारी आर्य सागर ने राष्ट्र और धर्म की वेदसंगत व्याख्या करते हुए कहा कि राष्ट्र कोई साकार वस्तु नहीं है यह एक अमूर्त भावना है। जिसे हमारे दिव्य संस्कारों से बल प्राप्त होता है । इसलिए हमको समय रहते विचार मंथन करना चाहिए और हम अपने ऋषियों द्वारा प्रणीत 16 संस्कारों को जीवन में उतारने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि धर्म भी आचरण की वस्तु है इसे बाह्य आचरण में अपना कर लोग दिखाने का प्रयास करते हैं, जो कि गलत है। आंतरिक जगत को शुद्ध और पवित्र कर धर्म हमें संसार के लिए उपयोगी बनाता है ,इसलिए हमको अपने आंतरिक जगत की पवित्रता पर विचार करना चाहिए। इस कार्यक्रम का सफल संचालन वेद प्रचारिणी सभा के जिलाध्यक्ष प्रधान विजेंद्र सिंह आर्य द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि वेद की आज्ञाओं का यथावत पालन करना परमपिता परमेश्वर की सच्ची भक्ति करना है। जिस जीवन में वेद की आज्ञाओं का प्रादुर्भाव हो जाता है, वह संसार के लिए उपयोगी बन जाता है। इसलिए हमें वेद की आज्ञाओं का संसार भर में प्रचार प्रसार करने में किसी प्रकार का संकोच नहीं करना चाहिए।
सभा की अध्यक्षता महावीर सिंह आर्य द्वारा की गई। उन्होंने कहा कि परायण यज्ञों के लिए इस समय प्रतिनिधि सभा के पास लगभग एक दर्जन प्रस्ताव आ चुके हैं और अब यह कार्यक्रम पूरे जनपद में घूम-घूम कर संपन्न किए जाएंगे।
यज्ञ के ब्रह्मा और धर्माचार्य प्रमुख स्वामी वेदानंद सरस्वती ने शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन करवाया। इस अवसर पर इंद्राज शास्त्री, योगाचार्य प्रमुख प्रताप सिंह आर्य, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से नीरज कुमार, जयप्रकाश आर्य ,आर्य समाज सिकंदराबाद के प्रधान रमेश सिंह आर्य, मास्टर दिनेश आर्य, राम प्रसाद आर्य, हरस्वरूप आर्य ,बलबीर सिंह आर्य, सुनील आर्य, हरिकिशन आर्य, राहुल आर्य ,जीतराम आर्य, गजराज सिंह आर्य आदि आर्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजक हेम सिंह आर्य ने सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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