Jdnews Vision…
….राघवेद्र मिश्रा….
…..मैनेजिंग एडिटर….
*न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दुःखं,न मन्त्रो न तीर्थं न वेदा न यज्ञः।अहं भोजनं नैव भोज्यं न भोक्ता,चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम्* ।
श्रावण मास का प्रथम सोमवार भगवान शिव की आराधना का अत्यंत पावन एवं मंगलकारी दिन माना जाता है। काशी की प्राचीन पंचांग परंपरा के अनुसार इस दिन श्रद्धा, संयम, जप, अभिषेक और उपवास का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि प्रथम श्रावण सोमवार से आरंभ की गई शिव साधना पूरे मास में अनेक गुना पुण्यफल प्रदान करती है।
इस दिन प्रातःकाल स्नान कर शिवलिंग पर गंगाजल, जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा एवं आक के पुष्प अर्पित कर “ॐ नमः शिवाय” तथा महामृत्युंजय मंत्र का जप करना अत्यंत शुभ माना गया है। भगवान शिव अपने भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण कर उन्हें स्वास्थ्य, सुख, शांति, समृद्धि तथा संकटों से रक्षा का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
श्रावण का प्रथम सोमवार हमें केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि सत्य, सेवा, संयम, करुणा, क्षमा और सदाचार का भी संदेश देता है। शिव का जीवन त्याग, लोककल्याण और समभाव का प्रतीक है। इसलिए इस पावन अवसर पर प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का संकल्प लेना चाहिए।
हर-हर महादेव!
भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा आप सभी पर बनी रहे, यही मंगलकामना है।
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