Jdnews Vision…
गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति ही योग्यता का सही निर्धारण करने में सक्षम है : डॉ राकेश कुमार आर्य….
ग्रेटर नोएड : : यहां स्थित गुरुकुल मुर्शदपुर में 80 वाँ स्वाधीनता दिवस बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया।
झंडारोहण के पश्चात आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश की न्याय सभा के प्रधान न्यायाधीश और आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के जिलाध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि गुरुकुल की शिक्षा पद्धति ही योग्यता का सही निर्धारण करने में सक्षम होती है। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में हमारे आचार्य लोग विद्यालय में ही बच्चे की योग्यता का निर्धारण करते हुए उसका वर्ण सुनिश्चित कर देते थे। यही सिस्टम आजकल कैंपस कलेक्शन के रूप में देखा जाता है। यद्यपि कैंपस सिलेक्शन अपने आप में उतनी जिम्मेदार प्रणाली नहीं है जितनी सक्षम और जिम्मेदार प्रणाली वर्ण व्यवस्था के रूप में देखी जाती थी । हमारे प्राचीन गुरुकुलों में आचार्य लोग बच्चों के गुण कर्म स्वभाव देखकर ही उनका वर्ण निश्चित करते थे। साथ ही उन्हें संस्कार देने का भी भरपूर प्रयास किया जाता था। यहां तक कि वैदिक व्यवस्था के अंतर्गत शूद्र को भी संस्कार देने का पूर्ण प्रबंध किया जाता था। उन्होंने कहा कि यहां पर कार्यरत आचार्य वेद प्रकाश जी वैदिक कालीन गुरुकुल शिक्षा प्रणाली के आदर्श उदाहरण हैं। आचार्य जी बच्चों के भीतर संस्कार उकेरने के साथ-साथ उन्हें समाज और राष्ट्र का एक जागरूक सजग और सुसभ्य, सुसंस्कृत और सुशिक्षित नागरिक बनाने के प्रति भी पूर्णतया सचेत हैं। वास्तव में ऐसे आचार्य ही राष्ट्र निर्माता होते हैं।

डॉ आर्य ने कहा कि गुरुकुलों के भीतर ही हम वेद के राष्ट्रगान को भी सुन पाते हैं। अन्यत्र यजुर्वेद के उस मंत्र को अध्यापक वर्ग जानता भी नहीं है। क्योंकि उसे कभी वेद से परिचित नहीं कराया गया। हम अपने राष्ट्रगान जन गण मन… और वंदे मातरम का भी पूरा सम्मान करें। क्योंकि इससे हमारी राष्ट्रीय भावनाएं जुड़ी हुई हैं । उन्होंने बच्चों की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि यह आप सब का सौभाग्य है कि आपको वैदिक शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत राष्ट्र का एक जिम्मेदार नागरिक बनाकर देने की तैयारी की जा रही है।
भाषा प्रचारिणी सभा के जिला ध्यक्ष ब्रह्मचारी आर्य सागर ने इस अवसर पर कहा कि बच्चे राष्ट्र की अनमोल निधि होते हैं। जिन बच्चों को बचपन से ही क्रांतिकारी भावों से ओतप्रोत कर दिया जाता है, वही बड़े होकर राष्ट्र नायक बनते हैं। उन्होंने कहा कि अनेक क्रांतिकारी ऐसे रहे हैं जिन्होंने बाल्यावस्था से ही राष्ट्रभक्ति के संस्कार प्राप्त कर लिए थे। उन बच्चों ने यौवन से भी पहले बलिदान देने की तैयारी कर ली थी। कई क्रांतिकारी तो ऐसे रहे, जिन्होंने यौवन भी नहीं देखा, कई ऐसे रहे जिन्होंने यौवन की दहलीज पर जाकर देश के लिए अपना बलिदान दे दिया। उन्होंने कहा कि आज जिस प्रकार संस्कारहीन युवा शक्ति राष्ट्र के लिए नए-नए झंझट खड़े करके राष्ट्र की सकारात्मक दिशा को बदलने की कोशिश कर रही है, वह दुर्भाग्य का विषय है। परंतु इसमें उन बच्चों का उतना दोष नहीं है, जितना शिक्षा प्रणाली का दोष है। इसलिए हमको अपनी वैदिक शिक्षा प्रणाली और संस्कारों से युक्त शिक्षा को ही दिलाने पर जोर देना चाहिए।
गुरुकुल के अधिष्ठाता देव मुनि जी महाराज ने इस अवसर पर कहा कि भारत को आजाद कराने में महर्षि दयानंद जी का विशेष योगदान रहा। जिन्होंने अनेक क्रांतिकारियों को तैयार करने के लिए आर्य समाज जैसी पवित्र संस्था की स्थापना की। इस संस्था ने अनेक क्रांतिकारियों को तैयार किया । इसीलिए आर्य समाज जैसी पवित्र संस्था को अंग्रेज क्रांतिकारियों की फैक्ट्री कहने लगे थे। महर्षि के शिष्यों ने सर्वत्र क्रांति मचाई और देश को आजाद कराया। उन्होंने कहा कि गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चों के लिए आज भी देश के सामने खड़ी कई प्रकार की चुनौतियां उनकी प्रतीक्षा कर रही हैं । इस दृष्टिकोण से महर्षि दयानंद जी की शैली में कार्य करने वाले आचार्य और उनके शिष्यों का विशेष दायित्व बन जाता है कि वह समाज और राष्ट्र के सामने खड़ी समस्याओं के प्रति गंभीर होकर अपने दायित्वों का निर्वाह करने की तैयारी करें।
वेद प्रचारिणी सभा के जिलाध्यक्ष विजेंद्र सिंह आर्य ने कहा कि बच्चों का कोमल मन एक गमले की भांति होता है, जिसमें संस्कार रूपी जैसा भी पौधा आप रखते हैं वैसा ही पौधा विकास करने लगता है। गुरुकुल की शिक्षा प्रणाली की यह विशेषता है कि वह सदा ही बच्चों के कोमल मन पर सुसंस्कार अंकित करने का कार्य करते हैं। आज आवश्यकता है कि शिक्षा प्रणाली के माध्यम से ही बच्चों को देशभक्ति का पाठ पढ़ाया जाए, स्वतंत्रता के नाम पर स्वछंदता का खेल बंद किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चे राष्ट्र की अनमोल निधि है इस निधि को ही राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी मानकर काम करना चाहिए। जिस राष्ट्र के बच्चे वीर होते हैं, वही संस्कारवान राष्ट्र का निर्माण करने में सफल और सक्षम होते हैं।
गुरुकुल के आचार्य वेद प्रकाश ने बताया कि उनके विद्यार्थी जहां वैदिक धर्म की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं वही आधुनिक अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली से भी जुड़ रहे हैं, इस बात का भरसक प्रयास किया जा रहा है कि बच्चों के भीतर किसी भी प्रकार की हीन भावना विकसित न हो और वह गुरुकुल से बाहर जाने के बाद अपने आप को पिछड़ा हुआ अनुभव न करें। उनके भीतर आत्मविश्वास जागृत करने और स्वाभिमानी बनने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने अपने विद्यार्थियों की जीवनचार्य के बारे में भी बताया कि किस प्रकार सारे विद्यार्थी प्रातः काल में शीघ्र जागकर अपनी दैनिक क्रियाओं को पूर्ण करने के पश्चात विद्यालय के सारे कार्यों को संपन्न कराने में सहयोग करते हैं और वैदिक शिक्षा के प्रति भी उनके भीतर विशेष जिज्ञासा का भाव है।
इस अवसर पर विद्यालय के सभी विद्यार्थियों के गुण कर्म स्वभाव से भी आचार्य श्री ने उपस्थित विद्वानों और अतिथियों का परिचय कराया। सभी उपस्थित आगंतुक महानुभावों ने विद्यालय के विद्यार्थियों को इस अवसर पर पुरस्कृत भी किया। इस अवसर पर श्री महेश आर्य, श्री यशपाल आर्य, श्री अजय कुमार आर्य, मास्टर विजय सिंह आर्य सहित अनेक आगंतुक महानुभाव उपस्थित थे।
Jd News Vision