नेपाल जल प्रलय में 160 मौतें और 750+ लापता, 133 भारतीयों से संपर्क टूटा, अब बिहार-UP में क्यों बढ़ा खतरा?…

Jdnews Vision….

नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के पास प्रलयकारी बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई है। पानी और मलबे के तेज बहाव ने सैकड़ों जिंदगियां लील लीं। अब तक 160 लोगों के शव मिल चुके हैं, जिनमें नेपाल के 157 और तिब्बत के 3 लोग शामिल हैं।

750 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।

रसुवा इलाके में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियां उफान पर हैं। इस विनाशकारी सैलाब की वजह से नेपाल का संपर्क ढांचा बुरी तरह ध्वस्त हो गया है। 35 पक्के पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह चुके हैं। बाढ़ का पानी, मलबा और तेज बहाव कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और गाड़ियों को बहा ले गया। इसका असर भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश तक पहुंचने की आशंका है। बिहार और यूपी में अलर्ट जारी किया गया है।

नेपाल की बाढ़ का सीधा असर भारत की सीमा से लगे इलाकों पर पड़ सकता है। नेपाल का पानी त्रिशूली नदी से होते हुए भारत की तरफ बढ़ रहा है। खास नजर गंडक, नारायणी और कोसी नदी पर है। बिहार में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में सतर्कता बढ़ाई गई है। सीतामढ़ी और शिवहर पर भी नजर रखी जा रही है।

पश्चिम चंपारण के DM तरनजोत सिंह ने बताया,

“नेपाल में पानी देवघाट से आगे बढ़ चुका है। वाल्मीकिनगर बैराज और तटबंधों की निगरानी की जा रही है। सुबह करीब 9 बजे पानी बैराज तक पहुंचने की उम्मीद है। फिलहाल जलस्तर खतरे के निशान से नीचे रहने की उम्मीद है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को अलर्ट कर दिया गया है।”

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर में भी प्रशासन को सतर्क किया गया है। नेपाल से आने वाली करीब 3 मीटर तक की फ्लड वेव को लेकर निगरानी बढ़ाई गई है।

नेपाल में आखिर हुआ क्या?

26 अगस्त सुबह नेपाल-चीन सीमा के पास अचानक पानी और मलबे का सैलाब आया। शुरुआत में इसे भूकंप से जोड़कर देखा गया। बाद में अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के आकलन में सामने आया कि पहाड़ का बड़ा हिस्सा खिसकने से जबरदस्त झटका पैदा हुआ था। इसे सामान्य भूकंप नहीं माना गया। लैंडस्लाइड इतना ताकतवर था कि उससे करीब 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा सीस्मिक सिग्नल बना।

माना जा रहा है कि ग्लेशियर और चट्टानों का बड़ा हिस्सा ल्हेन्डे खोला में गिरा। इससे पानी, बर्फ, पत्थर और कीचड़ तेजी से नीचे आया। ल्हेन्डे खोला आगे जाकर भोटेकोशी नदी से जुड़ता है। फिर यही तेज बहाव दूसरे नदी तंत्रों में पहुंचा और तबाही फैलती चली गई।

750 से ज्यादा लोग लापता, 133 भारतीय भी शामिल

लापता लोगों को लेकर भी अलग-अलग चरणों में आंकड़े सामने आए हैं। शुरुआती अपडेट में 750 से ज्यादा लोगों के लापता होने की बात कही गई। बाद के सरकारी विवरण में 403 लोगों के संपर्क में नहीं होने की जानकारी दी गई, जिनमें 341 विदेशी और 62 नेपाली नागरिक बताए गए।

विदेशी नागरिकों में सबसे ज्यादा 133 भारतीय हैं। इसके अलावा 37 भारतीय मूल के NRI भी लापता बताए गए हैं। कुल मिलाकर कम से कम 25 देशों के नागरिकों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। अमेरिका के 47, इटली के 90, यूक्रेन के 53, ऑस्ट्रेलिया के 34, दक्षिण कोरिया के 9 और रूस के 4 नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया।

बाढ़ की रफ्तार इतनी तेज थी कि लोगों को संभलने तक का समय नहीं मिला। कई जगह पानी करीब 30 फीट तक ऊपर उठ गया। लोग जान बचाने के लिए घरों की तीसरी और चौथी मंजिल तक पहुंच गए। बहाव अपने साथ मलबा, गाड़ियां और दूसरी चीजें करीब 150 किलोमीटर दूर चितवन तक ले गया। वहां भी बड़ी संख्या में शव बरामद हुए हैं। सरकारी अपडेट में अलग-अलग समय पर आंकड़े बदले हैं। एक अपडेट में 157 शव मिलने की बात थी, जबकि व्यापक रिपोर्टों में मौतों का आंकड़ा 160 तक पहुंच गया।

750 से ज्यादा लोग लापता, 133 भारतीय भी शामिल

लापता लोगों को लेकर भी अलग-अलग चरणों में आंकड़े सामने आए हैं। शुरुआती अपडेट में 750 से ज्यादा लोगों के लापता होने की बात कही गई। बाद के सरकारी विवरण में 403 लोगों के संपर्क में नहीं होने की जानकारी दी गई, जिनमें 341 विदेशी और 62 नेपाली नागरिक बताए गए।

विदेशी नागरिकों में सबसे ज्यादा 133 भारतीय हैं। इसके अलावा 37 भारतीय मूल के NRI भी लापता बताए गए हैं। कुल मिलाकर कम से कम 25 देशों के नागरिकों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। अमेरिका के 47, इटली के 90, यूक्रेन के 53, ऑस्ट्रेलिया के 34, दक्षिण कोरिया के 9 और रूस के 4 नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया।

77 तीर्थयात्रियों से भी संपर्क टूटा

कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे लोगों पर भी बाढ़ का असर पड़ा है। ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्रियों से संपर्क टूट गया। फाउंडेशन के मुताबिक, समूह ने तिब्बती इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली थी। सुबह 9:05 बजे समूह के लीडर प्रवीण से आखिरी बार बात हुई थी। इसके करीब 10 मिनट बाद संपर्क नहीं हो सका।

नेपाल में फंसे एक व्यक्ति केशव प्रसाद बराल ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा, “मलबे का सैलाब अचानक हमारी तरफ आया। मैंने पत्नी का हाथ पकड़ने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव उन्हें अपने साथ ले गया। करीब चार-पांच घंटे बाद हेलिकॉप्टर से मुझे निकाला गया। मेरी पत्नी अब भी मलबे के नीचे हैं।”

पुल, सड़क और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तबाह

बाढ़ ने नेपाल के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है। अलग-अलग सरकारी अपडेट में 19 पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़कें तबाह होने की जानकारी दी गई। शुरुआती आकलन में 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बहने की बात भी सामने आई थी। यानी नुकसान का आंकड़ा रेस्क्यू और सर्वे आगे बढ़ने के साथ बदल रहा है। करीब 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी प्रभावित हुए हैं। कई वाहन तेज बहाव में बह गए। चीन-नेपाल सीमा से जुड़े रास्ते और इमिग्रेशन कॉम्प्लेक्स तक पानी और मलबे की चपेट में आए।

भारत ने भेजी राहत सामग्री, PM मोदी ने किया फोन

भारत ने राहत अभियान में मदद के लिए नेपाल को 10 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाइयां भेजी हैं। भारतीय वायुसेना का C-130J विमान टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयां लेकर काठमांडू पहुंचा। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि राहत के लिए और मदद जुटाई जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के PM बालेन्द्र शाह से फोन पर बात की और जानमाल के नुकसान पर दुख जताया। PM मोदी ने कहा कि “इस मुश्किल समय में भारत के लोग नेपाल के अपने भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़े हैं। भारत हर संभव मानवीय मदद देने के लिए तैयार है।” भारतीय टीमें नेपाली अधिकारियों के साथ राहत और बचाव में तालमेल कर रही हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन रातभर जारी, खतरा अभी टला नहीं

नेपाल में रातभर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलता रहा। 11 टीमें अलग-अलग इलाकों में तैनात की गईं। हेलिकॉप्टर से लोगों को निकालने के साथ सुरंगों और मलबे में फंसे लोगों की तलाश भी जारी है। नुवाकोट में एक व्यक्ति को खुदाई करने वाली मशीन की मदद से जिंदा निकाला गया।

नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास रहने वालों को अभी भी सावधानी बरतने को कहा है। चीन की तरफ नदी के रास्ते बनी झील के पूरी तरह खाली नहीं होने से खतरा बना हुआ है। इसलिए नदी किनारे जाना और निचले इलाकों में रहना फिलहाल जोखिम भरा है।

यह आपदा बताती है कि पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड, अचानक पानी बढ़ने और नदी के तेज बहाव का खतरा कितनी तेजी से बड़ी तबाही में बदल सकता है। नेपाल में राहत और रेस्क्यू जारी है, लेकिन भारत में भी खासकर बिहार और यूपी के नदी किनारे के इलाकों को अगले कुछ समय तक बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।

Pallavi Kumari Oneindia

GF……

 

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