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*खराब खानपान, गिरते चरित्र व देश और धर्म के खिलाफ काम करने की वजह से प्रकृति द्वारा मिलने वाली सजा के कारण ही इस समय पर लोग दुखी हैं*
आगरा: : उत्तर प्रदेश परम् पूज्य परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 03 सितंबर 2026 को सतसंग में कहा कि शुरू में जब दुनिया बनी थी, मानव और पेड़-पौधे बने थे तब केवल एक ही धर्म था; मानव धर्म। मानव धर्म के अन्तर्गत सत्य धर्म, दया धर्म, परोपकार धर्म और सेवा धर्म आता है।
यह है धर्म, लेकिन इसको आप कितने लोग फॉलो कर रहे हो और आप जो सतसंग सुनते हो, सुनते-सुनते इसकी जानकारी आपको हो गई है और आप उन चीजों पर अमल करते हैं लेकिन और दुनियादार क्या करते हैं? धर्म का कितना पालन करते हैं? धर्म जब नहीं रहता है तब कर्म खराब हो जाते हैं इसीलिए इस समय पर लोगों के कर्म खराब हो रहे हैं।
मानवता चली जा रही है, सदाचार चला जा रहा है। लोगों का खानपान खराब हो रहा है, उनका चरित्र गिर रहा है। लोग देश और धर्म के खिलाफ काम कर रहे हैं। जब नियम के खिलाफ कोई काम करता है तो उसको सजा मिलती है, ऐसे ही जब लोग धर्म, प्रकृति के खिलाफ काम करते हैं तब सजा मिलती है और यही कारण है कि इस समय पर सब के सब दुखी हैं।
*इस समय बढ़ते मानसिक व शारीरिक कष्टों का क्या कारण है?*
इस समय पर कोई सुखी नहीं है; चाहे किसान हो, चाहे व्यापारी हो, चाहे अधिकारी-कर्मचारी हो, चाहे मजदूर हो, चाहे नौजवान विद्यार्थी हो। कोई शरीर से कष्ट पा रहा है, कोई धन की कमी में कष्ट पा रहा है, कोई मानसिक तकलीफ में कष्ट पा रहा है लेकिन कष्ट सबको है। उसका मुख्य कारण है कि लोगों ने सन्तों का रास्ता यानी जो अनादिकाल का रास्ता था, उसे छोड़ दिया।
सन्तों के पास आना-जाना बंद कर दिया, उनका सतसंग सुनना बंद कर दिया और उनके बताए गए रास्ते पर चलना बंद कर दिया। जिस तरह भगवान ने पाप और पुण्य, दिन और रात, जमीन और आसमान, पूर्व और पश्चिम, उत्तर और दक्षिण बनाया है। ऐसे ही जहां दुख है वहां सुख भी है।
लेकिन सुख मिलेगा कैसे? यह काया सुखी कैसे होगी?मानसिक शांति कैसे मिलेगी? प्रभु याद कैसे आएंगे? उनकी दया कैसे मिलेगी? इन सारी चीजों का उत्तर है कि सन्त मत को समझो, सन्त मत के अनुसार चलने की कोशिश करो, सन्तों के बताए रास्ते पर चलो।
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