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अयोध्या हृदय, मिथिला मन, चित्रकूट चित्त और लंका अहंकार का प्रतीक : अच्युतानंद शास्त्री…

जेडी न्यूज विजन….

सन्तोष कुमार गुप्ता….

गोरखपुर : : कौड़ीराम : : सिद्धपीठ बाबा बम्बनाथ मंदिर परिसर पांडेयपार में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवें दिन कथावाचक आचार्य पंडित अच्युतानंद शास्त्री ने रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा अयोध्या हृदय, मिथिला मन, चित्रकूट चित्त और लंका अहंकार का प्रतीक है। अयोध्या में सभी भगवान के भक्त हैं, मिथिला में सभी ज्ञानी हैं और चित्रकूट में सभी का चित्त भक्ति में मग्न है, जबकि लंका में विभीषण को छोड़ अधिकांश लोग अधर्म के मार्ग पर हैं।

उन्होंने कहा मिथिला में ज्ञान तो है, लेकिन वहां अकाल भी पड़ता है। इसका तात्पर्य यह है कि जब तक ज्ञान भक्ति के रस में नहीं डूबेगा, तब तक जीवन में आनंद की प्राप्ति नहीं हो सकती। कथा मनोरंजन का नहीं, बल्कि मन के परिष्कार और आत्मशुद्धि का माध्यम है।

कथावाचक ने मुनि विश्वामित्र के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा जिस ब्रह्म की प्राप्ति के लिए उन्होंने वन में कठोर तपस्या की, वही उन्हें गृहस्थ जीवन में प्राप्त हुआ। यज्ञ की एक पूर्णाहुति के बाद वे दूसरी यज्ञ-पूर्णता के लिए राम और लक्ष्मण को लेकर मिथिला की ओर प्रस्थान करते हैं।

कथा के दौरान अहिल्या उद्धार, ताड़का वध, राम-लक्ष्मण का विश्वामित्र के साथ मिथिला आगमन, जनकपुर भ्रमण तथा पुष्प वाटिका में राम और सीता के प्रथम मिलन का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया, जिसे सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

कथा के मुख्य यजमान गुलाब रध्वज उर्फ महंथ सिंह व भाजपा जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी ने व्यासपीठ की आरती की। रतन प्रकाश दुबे, धर्मेंद्र मिश्रा, संजय सिंह, मनोज शुक्ला सोनालिका, सांसद प्रतिनिधि अरविंद पाण्डेय, अरुण, अश्विनी राय, रमेश मास्टर, छागुर राम तिवारी, जयशंकर दुबे, रमाशंकर, विनय शुक्ला, वीरेंद्र दुबे पहलवान, अनिल सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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