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अरुण कुमार राव….
देवरिया,14 सितंबर : : हिन्दी दिवस के अवसर पर सभा के अध्यक्ष डॉ जयनाथ मणि त्रिपाठी, मंत्री डा. अनिल कुमार त्रिपाठी तथा समिति के सदस्य गण द्वारा पुट्पर्ति नाग पद्ममिनी, हिन्दी प्रचारक हैदराबाद, तेलंगाना को नागरी रत्न सम्मान से अलंकृत किया। पद्मिनी जी को सम्मान के तहत प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र, साल तथा 11 हजार रूपए नकद प्रदान किये गये। इनके प्रशस्ति पत्र का वाचन डॉ मधुसूदन मणि त्रिपाठी ने किया। इसके उपरांत सुरेन्द्र वाजपेई, प्रसिद्ध उपन्यासकार, वाराणसी को नागरी भूषण सम्मान से अलंकृत किया गया। श्री वाजपेई जी को सम्मान के तहत प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र एवं साल के साथ 7 हजार रुपए नकद प्रदान किया गया। वाजपेई जी के प्रशस्ति पत्र का वाचन इन्द्र कुमार दीक्षित ने किया। गोपालगंज, बिहार से आये प्रख्यात कवि सर्वेश तिवारी को नागरी श्री सम्मान से सभा ने सम्मानित किया। श्री तिवारी जी को सम्मान के तहत प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र, साल तथा 5 हजार रुपए नकद भेंट दिए गये। श्री तिवारी जी के प्रशस्ति पत्र का वाचन ब्रजेश पाण्डेय संयुक्त मंत्री ने किया।
इसके बाद नागरी रत्न से अलंकृत पुट्पर्ति नाग पद्ममिनी ने अपने उद्बोधन में कहा मेरे पिताजी कहा करते थे तुम जितनी भाषा सीखोगी तुम्हारा ह्रदय उतना ही विशाल होगा। उन्होंने बहुत पहले कहा तेलुगू के साथ हिन्दी में भी काम करो क्योंकि हिन्दी विश्व भाषा बनने जा रही है। आगे पद्ममिनी जी ने अपने पिता द्वारा तेलुगू में रचित शिव तांडव का तेलुगू तथा हिन्दी दोनों भाषाओं में ओज पूर्ण वाचन कर सबको भाव विह्वल कर दिया।नागरी भूषण सम्मान से सम्मानित सुरेन्द्र वाजपेई ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा हिन्दी की साधना दो अर्थों में होती है पहला साधक और दूसरा सेवी के रुप में केवल हल्ला करने से हिन्दी का विकास नहीं होगा। हिन्दी के प्रत्येक क्षेत्र में मन से परिश्रम करना पड़ेगा। मैं आप लोगों के प्रति मन से कृतज्ञ हूं। नागरी श्री से सम्मानित श्री सर्वेश तिवारी श्रीमुख ने अपनी बात कविता में कही कि जब समाज में मर्यादा के वस्त्र उतारे जायेंगे, द्रोण, भीष्म भी छल से मारे जायेंगे।
इसके बाद सभा के नये आजीवन सदस्य अमित कुमार त्रिपाठी, राम मनोहर मिश्र मिहिर, अमित कुमार अग्रवाल, प्रभाकर मिश्र, रंजीता श्रीवास्तव, बद्री प्रसाद वर्मा अनजान, जितेन्द्र सिंह, कालिंदी बृजेश त्रिपाठी, सुनील त्रिपाठी, राकेश मिश्रा, गिरिजेश पति त्रिपाठी, अजय कुमार उपाध्याय, अमित कुमार सिंह को प्रमाण पत्र दिया गया और शपथ दिलाई गई। फिर 11 सितंबर को हुए वाद विवाद प्रतियोगिता में पुरस्कृत छात्र छात्राओं को पुस्तक एवं प्रमाण पत्र अतिथि गण द्वारा दिया गया।
समारोह का ओज पूर्ण एवं भाव प्रवण संचालन रविकांत मणि त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ सौरभ श्रीवास्तव ने पूरे मनोयोग के साथ सम्पूर्ण व्यवस्था को सुनिश्चित कराया। इस अवसर पर दिनेश कुमार त्रिपाठी, संजय कुमार राव, जय प्रकाश मणि त्रिपाठी, डॉ रमाकांत कुशवाहा, डॉ शकुंतला दीक्षित, सौदागर सिंह, पुरुषोत्तम मरोदिया, वृद्धि चन्द्र विश्वकर्मा, इन्द्र कुमार दीक्षित, डॉ दिवाकर प्रसाद तिवारी, जगदीश उपाध्याय, रवीन्द्र नाथ तिवारी, डा मधुसूदन मिश्र, रमेश चन्द्र त्रिपाठी, अशोक दीक्षित, नन्दलाल मणि, पुष्पा सिंह विसेन, भृगुदेव मिश्र, अंजलि अरोड़ा खुशबू, सुबास राय पूर्व सभासद, कौशल कुमार मिश्र, ताज मोहम्मद, विजय भारत सिंह ऋषिकेश मिश्र, गोपाल जी त्रिपाठी, अरुण राव, रजनीश मोहन गोरे, श्वेतांक मणि त्रिपाठी आदि गणमान्य उपस्थित रहे। इसके पूर्व समारोह का शुभारम्भ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्जवलन तथा राष्ट्र गीत के साथ हुआ। सरस्वती वंदना अंजलि अरोड़ा खुशबू ने और स्वागत गीत दयाशंकर कुशवाहा ने किया। सभा के मंत्री डॉ अनिल कुमार त्रिपाठी ने आगत अतिथियों का परिचय श्रोताओं से कराया एवं सभा की परंपरा से अवगत कराया। अंत में राष्ट्र गान के पश्चात समारोह के समापन की घोषणा की गयी।
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