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– नौ दिवसीय श्रीराम कथा का छठवां दिन…
गोरखपुर: कौड़ीराम : : क्षेत्र के पाण्डेपार स्थित बाबा बम्बनाथ मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के छठे दिन कथावाचक पं. अच्युतानंद शास्त्री ने श्रीराम जन्म, नामकरण संस्कार एवं मुनि विश्वामित्र द्वारा राम-लक्ष्मण को साथ ले जाने के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कथावाचक ने कहा भगवान श्रीराम के जन्म के उपरांत संपूर्ण अयोध्या हर्षोल्लास से झूम उठी थी। घर-घर मंगलगीत गूंज रहे थे और उत्सव का वातावरण था। गुरु वशिष्ठ ने नामकरण संस्कार करते हुए कहा जो समस्त संसार को सुख प्रदान करे, वही राम है। वृद्धावस्था में प्राप्त चारों पुत्र राजा दशरथ को प्राणों से भी बढ़कर प्रिय थे। जब मुनि विश्वामित्र राक्षसों के संहार हेतु राम और लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने के लिए अयोध्या पहुंचे तो पुत्र-मोहवश राजा दशरथ ने उन्हें भेजने से इन्कार कर दिया। तब गुरु वशिष्ठ ने महाराज को समझाते हुए कहा प्रभु श्रीराम का अवतार लोककल्याण और धर्म की स्थापना के लिए हुआ है। अंततः भारी मन और अश्रुपूरित नेत्रों से राजा दशरथ ने राम-लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ भेजने की अनुमति दी। इस मार्मिक प्रसंग का वर्णन सुनकर कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो उठे और अनेक श्रोताओं की आंखें नम हो गईं।
मुख्य यजमान एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता महंथ सिंह ने व्यासपीठ की आरती उतारकर पूजन-अर्चन किया। वरिष्ठ भाजपा नेता नित्यानंद मिश्र, नरेंद्र ध्वज सिंह, हिंदू युवा वाहिनी नेता मृत्युंजय सिंह, प्रधान श्रवण गुप्ता, दिवाकर सिंह, श्रवण यादव, राजेश पटेल, उमेश दुबे, शंभू दुबे, सुरेंद्र शुक्ला, राजेश प्रताप पाल, गंगेश सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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