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कोलकाता: : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के विधायकों की बगावत के बाद अब लोकसभा सांसदों ने भी मोर्चा खोल दिया है।
बागी गुट द्वारा केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक करने और केंद्र की एनडीए (NDA) सरकार को समर्थन देने की खबरों के बीच, TMC सांसद और ममता बनर्जी के वफादार नेता कल्याण बनर्जी ने बागियों पर जोरदार हमला बोला है।
“ममता बनर्जी की जगह नरेंद्र मोदी को चुना अपना नेता”
टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बागी सांसदों पर सीधे तौर पर निष्ठा बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ भाजपा नेता भूपेंद्र यादव से मुलाकात के साथ ही यह साफ हो गया है कि बागी गुट ने अब अपना पाला बदल लिया है। बनर्जी ने कहा, “जिस पल वे भूपेंद्र यादव के आवास पर गए, उन्होंने भाजपा का पक्ष ले लिया। उन्होंने अपने नेता को ममता बनर्जी से बदलकर नरेंद्र मोदी कर लिया है।”
भाजपा और बागी गुट को चुनौती देते हुए कल्याण बनर्जी ने स्पष्ट किया कि भले ही सत्ता पक्ष के पास ताकत हो, लेकिन वे बंगाल की जनता के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा, “आपके (भाजपा) पास सीएम, ईडी, सीबीआई और अन्य शक्तियां हो सकती हैं, लेकिन मेरे पास ‘मां, माटी, मानुष’, मेरी पार्टी, मेरे कार्यकर्ता और पश्चिम बंगाल के लोग हैं।”
आरजी कर विवाद और बागियों की चुप्पी पर सवाल
कल्याण बनर्जी ने विशेष रूप से बागी सांसद शर्मीला सरकार और काकोली घोष दस्तीदार को निशाने पर लिया। उन्होंने आरजी कर अस्पताल विवाद का जिक्र करते हुए दोनों नेताओं पर संकट के समय पार्टी और कार्यकर्ताओं का साथ न देने का आरोप लगाया। बनर्जी ने सवाल किया, “शर्मीला सरकार कितनी बार टीएमसी कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी हुई हैं? जब आरजी कर का मुद्दा सामने आया था, तब शर्मीला सरकार और काकोली दस्तीदार कहां थीं? उस समय मैं ही इस पर मुखर होकर बोल रहा था।”
पेशे से डॉक्टर शर्मीला सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इस गंभीर विवाद के दौरान मौन रहकर उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं किया। उन्होंने सीधे तौर पर कहा, “जब आरजी कर की घटना हुई तब आपने एक शब्द नहीं बोला।”
इस्तीफे और नए सिरे से चुनाव लड़ने की चुनौती
टीएमसी नेतृत्व ने बागी सांसदों से अपनी लोकसभा सीट छोड़ने और नए सिरे से जनादेश हासिल करने की मांग की है। कल्याण बनर्जी ने बागियों को चुनौती दी कि वे अपनी सीट बचाए रखने के बजाय पार्टी से इस्तीफा दें और मतदाताओं के बीच जाकर फिर से चुनाव लड़ें। इसी सुर में सुर मिलाते हुए टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने भी बागियों को आड़े हाथों लिया।
उन्होंने कहा, “हमारे 29 नेता ‘मां, माटी और मानुष’ के नाम पर जीते और सांसद बने। मैं इन गद्दारों से जानना चाहता हूं – चुनाव से पहले आपने अपनी दिक्कतें क्यों नहीं बताईं? चुनाव के बाद ही क्यों? कम से कम सुखेंदु शेखर रॉय ने राजनीतिक नैतिकता दिखाते हुए इस्तीफा तो दिया। अगर आपमें भी राजनीतिक नैतिकता बची है, तो आप सभी इस्तीफा दें और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर दिखाएं।”
TMC में टूट का ताजा घटनाक्रम
हालिया विधानसभा चुनावों में झटके के बाद टीएमसी में भगदड़ की स्थिति है। पार्टी का यह संकट केवल बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े विभाजन का रूप ले चुका है।
सांसदों का नया गुट: टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से लगभग 20 सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में एक अलग गुट बनाने की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। इन सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने की घोषणा करते हुए लोकसभा अध्यक्ष से संसद में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है।
विधायकों की बगावत: इससे ठीक पहले, पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी के लगभग 60 विधायकों ने भी ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बगावत कर दी थी और पार्टी के आधिकारिक फैसलों को मानने से इनकार कर दिया था।
वरिष्ठ नेताओं का पलायन: सुखेंदु शेखर रॉय जैसे वरिष्ठ नेता पहले ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राज्यसभा से इस्तीफा दे चुके हैं।
फिलहाल, दल-बदल कानून से बचने के लिए बागी सांसदों को कम से कम 19 सांसदों (दो-तिहाई बहुमत) की आवश्यकता है। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का गुट अब इस कानूनी और राजनीतिक लड़ाई को संसद से लेकर सड़क तक लड़ने की तैयारी कर रहा है।
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